Shashi Tharoor PMJVK
Shashi Tharoor PMJVK: केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम’ (PMJVK) योजना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार पर केरल की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। थरूर ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को टैग करते हुए पूछा है कि आखिर साल 2021 के बाद से इस महत्वपूर्ण योजना के तहत केरल को एक भी रुपया क्यों नहीं जारी किया गया है। उनके इस बयान ने केंद्र और राज्य के बीच बजटीय आवंटन की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।
शशि थरूर ने अपने पोस्ट में बताया कि लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान उन्हें इस मुद्दे पर चर्चा करने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। हालांकि, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा सदन के पटल पर रखे गए एक लिखित जवाब ने उन्हें हैरान कर दिया। मंत्री के जवाब के अनुसार, केरल को पिछले चार वर्षों (2021 के बाद) से PMJVK के तहत कोई वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की गई है। थरूर ने इसे चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह डेटा उस राज्य के लिए बेहद निराशाजनक है, जो अपनी सामाजिक विविधता और अल्पसंख्यक जनसंख्या के लिए जाना जाता है।
सांसद ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि केरल के कुल 34 ऐसे क्षेत्रों को PMJVK की ‘ज्यादा ध्यान दिए जाने वाले’ (High Focus) इलाकों की सूची में शामिल किया गया है, जहाँ अल्पसंख्यकों की संख्या अधिक है। थरूर ने सवाल किया कि जब केंद्र सरकार ने स्वयं इन इलाकों को विकास के लिए प्राथमिकता सूची में रखा है, तो फिर उन्हें फंड से वंचित क्यों रखा जा रहा है? उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि इतनी बड़ी अल्पसंख्यक आबादी वाले राज्य को अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए बनाई गई योजनाओं में सम्मानजनक और न्यायपूर्ण हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
थरूर ने केरल के ग्रामीण और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि कई स्कूलों की छतें टपक रही हैं और उनकी इमारतें किसी भी समय गिर सकती हैं। थरूर ने दो संभावनाओं की ओर इशारा किया—’क्या केरल की राज्य सरकार PMJVK के तहत समय पर और सही प्रस्ताव भेजने में विफल रही है, या फिर केंद्र सरकार ने केरल द्वारा भेजे गए सभी प्रस्तावों को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया है?’ उन्होंने स्पष्टता की मांग की ताकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में 26 नवंबर को नई दिल्ली में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने राज्यों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में केंद्र सरकार ने साफ तौर पर कहा था कि फंड का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए तेजी से किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने फंड के ‘पारदर्शी इस्तेमाल’ और ‘रियल टाइम मॉनिटरिंग’ की शर्त भी रखी थी। राज्यों को निर्देश दिए गए थे कि वे फंड जारी करने और खर्च करने की नई प्रक्रिया को सख्ती से लागू करें ताकि भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे।
शशि थरूर के इन तीखे सवालों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर विपक्ष आक्रामक रुख अपनाए हुए है। थरूर का मानना है कि बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए केंद्र को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। अब देखना यह है कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय थरूर के इन सवालों का क्या जवाब देता है और क्या केरल के जर्जर स्कूलों को सुधारने के लिए रुकी हुई निधि जल्द जारी की जाएगी।
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