Sheetala Ashtami 2026
Sheetala Ashtami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ‘शीतला अष्टमी’ के रूप में मनाया जाता है, जिसे लोक भाषा में ‘बसोड़ा’ भी कहते हैं। आज 11 मार्च, 2026 को यह पावन पर्व श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जा रहा है। सनातन परंपरा में शीतला माता को चेचक, खसरा और अन्य ताप जनित रोगों से मुक्ति दिलाने वाली देवी माना गया है। माता का स्वरूप अत्यंत शीतल है, जो अपने भक्तों को आरोग्य और सौभाग्य का वरदान प्रदान करती हैं। आइए जानते हैं कि इस दिन माता की विशेष कृपा पाने के लिए पूजा कैसे करें।
शीतला अष्टमी के दिन सुख-समृद्धि की कामना हेतु साधक को ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। इस दिन गर्म पानी के त्याग का विशेष महत्व है, इसलिए ठंडे पानी से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के लिए घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को शुद्ध कर वहां एक चौकी स्थापित करें। चौकी पर माता शीतला की प्रतिमा या चित्र रखें। माता के श्रृंगार में नीम की पत्तियों और हल्दी का प्रयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद चित्र पर गंगाजल छिड़क कर उन्हें अक्षत, चंदन, हल्दी, पुष्प और धूप अर्पित करें। शीतला माता को विशेष रूप से एक दिन पूर्व बना हुआ (बासी) भोजन, जैसे कि दही-चावल, हलवा-पूरी, मालपुआ और मीठे चावल का भोग लगाया जाता है।
पूजा के दौरान शीतला माता व्रत कथा और स्तोत्र का पाठ करना फलदायी होता है। पूजा संपन्न होने के बाद एक लोटे में शुद्ध जल या गंगाजल लें। इस जल में नीम की पत्तियां डालें और उसे अपने घर के हर कोने में तथा परिवार के सभी सदस्यों पर छिड़कें। मान्यता है कि ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और संक्रामक बीमारियों का खतरा टल जाता है। नीम को आयुर्वेद में एंटी-बैक्टीरियल माना गया है और माता शीतला के हाथों में भी नीम की टहनी और मार्जनी (झाड़ू) सुशोभित होती है, जो स्वच्छता का प्रतीक है।
शीतला माता की साधना करते समय इन प्रभावशाली मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए:
ॐ शीतलायै नमः
ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः
मंत्र: शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता। शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः॥
ध्यान मंत्र: वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्। मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्॥
शीतला अष्टमी पर कुछ विशेष कार्य करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर हल्दी से स्वास्तिक बनाना अत्यंत शुभ होता है, जो सुख-शांति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन नई झाड़ू खरीदकर घर लाना माता शीतला के आशीर्वाद का सूचक माना गया है। इसके अतिरिक्त, शीतला अष्टमी के दिन नीम और बरगद के वृक्ष की पूजा अवश्य करें, क्योंकि माना जाता है कि इन वृक्षों पर माता का वास होता है।
शीतला अष्टमी का व्रत केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। चैत्र का महीना ऋतु परिवर्तन का समय होता है, जब संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ता है। माता को ठंडा भोजन अर्पित करना और ठंडे जल से स्नान करना शरीर के तापमान को संतुलित रखने का एक संदेश है। हल्दी का तिलक और नीम का प्रयोग प्राकृतिक एंटीसेप्टिक का कार्य करता है, जो हमें निरोगी रखने में सहायक होता है।
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