Sheikh Hasina
Sheikh Hasina: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा सुनाई गई मौत की सजा पर भारत की ओर से पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत सरकार ने कहा है कि वह इस फैसले पर करीबी नजर बनाए हुए है और बांग्लादेश के सर्वोत्तम हितों के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में उल्लेख किया गया कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के इस निर्णय को “नोट” किया है और स्थिति पर निगरानी जारी रखेगा।
भारत ने साफ कहा कि एक घनिष्ठ पड़ोसी होने के नाते वह बांग्लादेश के लोगों के कल्याण के लिए समर्पित है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी कहा कि बांग्लादेश में शांति, लोकतंत्र, समावेशन और राजनीतिक स्थिरता अत्यंत आवश्यक है, और भारत हमेशा इन मूलभूत सिद्धांतों के समर्थन में खड़ा रहेगा। मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया कि भारत भविष्य में भी बांग्लादेश से जुड़े सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखेगा, ताकि देश में स्थिरता और लोकतांत्रिक माहौल को बढ़ावा मिल सके।
सोमवार को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) ने 78 वर्षीय शेख हसीना को गैरहाजिर रहते हुए मौत की सजा सुनाई। यह फैसला पिछले वर्ष जुलाई में हुए उन व्यापक छात्र प्रदर्शनों से जुड़ा है, जिनमें हसीना की सरकार पर मानवता-विरोधी अपराधों का आरोप लगाया गया था। पाँच अगस्त 2023 को सत्ता से बेदखल होने के बाद से हसीना भारत में रह रही हैं। अदालत द्वारा पहले ही उन्हें ‘भगोड़ा’ घोषित किया जा चुका था।
ढाका स्थित कड़ी सुरक्षा वाले अदालत कक्ष में निर्णय सुनाते हुए न्यायाधिकरण ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने बिना किसी संदेह के साबित कर दिया है कि 15 जुलाई से 15 अगस्त 2023 के बीच चले छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों पर हुई घातक कार्रवाई के पीछे हसीना की सीधी भूमिका थी। न्यायाधिकरण के अनुसार हसीना ने निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की अनुमति दी और कई स्थानों पर छात्रों के खिलाफ हिंसक अभियान का निर्देश जारी किया।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि ‘जुलाई विद्रोह’ के नाम से करीब एक महीने चले इन प्रदर्शनों के दौरान लगभग 1,400 लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों घायल हुए। रिपोर्ट के अनुसार ढाका और उससे सटे इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा की गई कार्रवाई बेहद घातक और अमानवीय थी। अदालत ने इसी हिंसा को आधार बनाते हुए निष्कर्ष निकाला कि हसीना सीधे तौर पर इस पूरे अभियान की “मुख्य साजिशकर्ता” थीं।
न्यायाधिकरण के अनुसार हसीना ने न केवल बल प्रयोग की अनुमति दी, बल्कि कई भड़काऊ बयान भी दिए, जिससे हिंसा और बढ़ी। अदालत ने कहा कि उनके निर्देशों के बाद ढाका और आसपास के क्षेत्रों में छात्रों के खिलाफ हत्या और उत्पीड़न की कई घटनाएं सामने आईं। इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर न्यायाधिकरण ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।
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