Sheikh Hasina
Sheikh Hasina: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में 3 अगस्त को मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। यह मामला मानवता के खिलाफ अपराधों से संबंधित है। नारायणगंज में हुई हिंसा के दौरान पुलिस और सुरक्षाकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आरोपों के तहत हसीना और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।
मुकदमे में मुख्य आरोपी शेख हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून हैं। अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने जुलाई 2024 के विद्रोह में मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में तीनों के खिलाफ फैसला सुनाया। कुल पांच आरोप लगाए गए थे, जिनमें से हसीना और कमाल को तीन में दोषी पाया गया। अदालत ने हसीना और कमाल को मृत्युदंड की सजा सुनाई, जबकि मामून को जेल की सजा दी गई।
मुकदमे में गवाह खोकन चंद्र बर्मन ने अदालत को बताया कि 18-19 जुलाई, 2024 को नारायणगंज के साइनबोर्ड क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस और सुरक्षाकर्मियों द्वारा गोलियाँ चलाई गईं। उन्होंने दावा किया कि 5 अगस्त, 2024 को जत्राबाड़ी में प्रदर्शनकारियों की हत्या की घटनाएँ उन्होंने देखी। खोकन ने कहा कि फ्लाईओवर के नीचे छिपे होने के बावजूद उन्हें गोली लगी, जिससे उनकी एक आँख चली गई और दूसरी की दृष्टि आंशिक रूप से प्रभावित हुई।
गवाह ने अदालत में बताया कि गोलीबारी के दौरान उनका चेहरा और नाक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। उन्हें बांग्लादेश और रूस के अस्पतालों में कई बार सर्जरी करानी पड़ी। खोकन ने अदालत से न्याय की अपील की और कहा कि हसीना, कमाल, आईजीपी मामून और अन्य अधिकारियों को उनके अपराधों की सजा मिलनी चाहिए।सुनवाई के दौरान अदालत में बांग्लादेश के जन आंदोलन पर एक डॉक्यूमेंट्री और वीडियो दिखाए गए। इन वीडियो में मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवारों ने पुलिस की हिंसा और अत्याचार की भयावह तस्वीरें दिखाई। इस डॉक्यूमेंट्री ने उपस्थित लोगों को झकझोर दिया और गवाहों तथा कुछ अभियुक्तों ने भावुक होकर रोना शुरू कर दिया।
मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने तर्क दिया कि हसीना ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आदेश दिए और यह कार्रवाई सीधे उनके नियंत्रण में हुई। अदालत में यह भी दावा किया गया कि हसीना ने सेना प्रमुख से बातचीत कर ‘ऑपरेशन’ शुरू करने के निर्देश दिए और ड्रोन और हेलीकॉप्टर से निगरानी कराई।हसीना और कमाल के वकील, आमिर हुसैन, ने खोकन की गवाही और जाँच रिपोर्ट में भिन्नताओं का हवाला देते हुए उनका बयान चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि गवाह क्यों कुछ दिनों बाद सड़क पर निकला। वहीं सरकारी वकील ने कहा कि बांग्लादेश सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, जाँच रिपोर्ट के आधार पर गवाह की गवाही को चुनौती नहीं दी जा सकती।
खोकन की गवाही के बाद अदालत ने 10 मिनट का ब्रेक लिया। सुनवाई के दौरान गवाह ने विस्तार से बताया कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा गोलियाँ क्यों और कैसे चलाई गईं। उन्होंने सड़क पर बिखरे खून और घायल प्रदर्शनकारियों की भयावह स्थिति का बारीक विवरण साझा किया।बांग्लादेश की विशेष अदालत ने हसीना और अन्य अधिकारियों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध की सुनवाई शुरू की है। गवाहों की गवाही और प्रस्तुत सबूत इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय ध्यान में ला रहे हैं। अदालत मृतकों और घायलों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई तेज कर रही है।
Read More: Sheikh Hasina Death Sentence: इंसाफ या राजनीति? यूनुस अदालत में हसीना को मौत की सज़ा
Press Freedom Index 2026: रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा जारी की गई 2026 की वार्षिक…
Ambikapur Fire Incident : अंबिकापुर शहर के राम मंदिर रोड पर हुए भीषण अग्निकांड में…
Iran-US Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे कूटनीतिक गतिरोध को…
Pawan Khera Bail : भारतीय राजनीति के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है।…
LPG Price Hike: मई महीने की शुरुआत के साथ ही आम आदमी की रसोई पर…
Health Tips: ड्राई फ्रूट्स की दुनिया में मुनक्का एक ऐसा नाम है, जिसे आयुर्वेद में…
This website uses cookies.