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Sheikh Hasina death sentence: शेख हसीना मामले पर पाकिस्तान का बयान, क्या यह कूटनीतिक रिश्तों में तनाव लाएगा?

Sheikh Hasina death sentence: बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला पिछले साल छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के दौरान हुई घातक कार्रवाई के आरोपों के तहत आया है। अदालत ने शेख हसीना के साथ ही पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी मौत की सजा सुनाई, जबकि पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामून को पांच साल की कैद की सजा दी गई।

Sheikh Hasina death sentence: पाकिस्तान ने टिप्पणी से किया इनकार

शेख हसीना को दी गई मौत की सजा पर पाकिस्तान ने शुक्रवार को कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि यह बांग्लादेश का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश की जनता अपनी समस्याओं को अपने लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुसार हल करने में सक्षम है। मैं इस विषय पर कोई और टिप्पणी नहीं करूंगा।”

Sheikh Hasina death sentence: भारत में रह रही हैं शेख हसीना

अदालत ने सोमवार को 78 वर्षीय शेख हसीना को पिछले साल 5 अगस्त को छात्र विरोध के दौरान हुई हिंसा और घातक कार्रवाई के लिए दोषी ठहराया। इस घटना के बाद से शेख हसीना भारत में हैं। बांग्लादेश सरकार ने अब भारत से शेख हसीना को सौंपने की मांग की है, जिससे भारत इसमें अहम भूमिका निभा सकता है।शेख हसीना के शासनकाल में बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंध तनावपूर्ण रहे थे। हालांकि, उनके सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार हुआ है। वर्तमान में दोनों देशों के व्यापार और रक्षा अधिकारी एक-दूसरे के यहां दौरों पर जा रहे हैं।

आरोपों की विस्तृत जानकारी

जस्टिस मोहम्मद गुलाम मोर्तुजा मोजुम्दार की अगुवाई वाली तीन-सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को दो मुख्य मामलों में दोषी ठहराया:

  • 5 अगस्त पिछले साल ढाका के चंकरपुल में 6 निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या

  • उसी दिन अशुलिया में 6 छात्र प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी

अशुलिया में मारे गए छह छात्रों में से पांच को मृत्युपरांत जला दिया गया, जबकि एक को कथित रूप से जिंदा आग में डाल दिया गया।

नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस का रुख

नोबेल पुरस्कार विजेता और अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण, भले ही सीमित, न्याय करार दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला प्रभावित हजारों लोगों के लिए संदेश है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। यूनुस ने बताया कि बांग्लादेश की अदालतों ने स्पष्टता के साथ यह फैसला सुनाया, जिसकी गूंज देश और दुनिया भर में सुनी जा रही है।शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा ने बांग्लादेश के न्यायिक तंत्र की गंभीरता को दिखाया है। पाकिस्तान ने इसे बांग्लादेश का आंतरिक मामला बताया, जबकि भारत के लिए यह एक संवेदनशील मामला बन गया है। न्याय और कानून की प्रतिष्ठा के दृष्टिकोण से यह फैसला वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

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