Shekhar Suman Reaction: छात्रों पर लाठीचार्ज से भावुक हुए अभिनेता, बोले- तीन दिन से नहीं सो पाया

Shekhar Suman Reaction:  अपनी बेबाक शैली के लिए जाने जाने वाले प्रसिद्ध अभिनेता और होस्ट शेखर सुमन अपने लोकप्रिय शो ‘शेखर टूनाइट’ के हालिया एपिसोड के दौरान बुरी तरह भावुक हो गए। शो की शुरुआत में ही उनका गला रुंध गया और आंखों में आंसू साफ नजर आए। उन्होंने राजधानी दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज की घटना का जिक्र किया। शेखर ने कहा कि उन डरावने और परेशान करने वाले विजुअल्स ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है, जिसके कारण वे पिछले तीन दिनों से चैन से सो नहीं पाए हैं और लगातार फफक-फफक कर रो रहे हैं।

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जंतर-मंतर की वह दिल दहला देने वाली घटना

शेखर सुमन ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर घटी उस खौफनाक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहां मौजूद वे सभी मासूम, निहत्थे और पूरी तरह बेबस बच्चे किसी अपराध के लिए नहीं थे, बल्कि उनके साथ जो सलूक हुआ वह बेहद दिल दहला देने वाला था। जिस अमानवीय बेरहमी, क्रूरता और निर्दयता के साथ उन पर ताबड़तोड़ लाठियां बरसाई गईं और उन्हें लहूलुहान किया गया, उसने देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। अभिनेता ने दर्द बयां करते हुए कहा कि इस मंजर ने उन्हें मानसिक रूप से इतना तोड़ दिया है कि वे पिछले बहत्तर घंटों से एक पल के लिए भी नहीं सो पाए हैं और बस उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

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युवा छात्रों का आखिर कसूर क्या था?

आगे बात करते हुए शेखर सुमन ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि आखिर उन युवा और मासूम बच्चों का वास्तविक कसूर क्या था? क्या उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने देश में हो रहे अन्याय और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई? उन्होंने अपने मौलिक अधिकारों, अपने सुनहरे भविष्य और इस महान देश के उज्ज्वल कल के लिए शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी थी। एक स्वस्थ, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त शिक्षा प्रणाली की मांग करना क्या कोई गुनाह है? लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय सत्ता और प्रशासन ने उन पर बेरहमी से लाठियां बरसाईं और आंसू गैस के गोले छोड़े।

हस्तिनापुर की तर्ज पर तंज

इस दौरान बेहद गंभीर और ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए शेखर ने कहा कि महाभारत की शुरुआत उस दिन से नहीं मानी जानी चाहिए जिस दिन कुरुक्षेत्र के मैदान में शंखनाद हुआ था, बल्कि उसकी असली शुरुआत उस दिन हो चुकी थी जिस दिन हस्तिनापुर के सिंहासन ने अपने ही युवाओं की आवाज सुनना हमेशा के लिए बंद कर दिया था। इतिहास वहीं से अपनी करवट बदलता है और नया रूप लेता है जब सत्ता का अहंकार यह मान लेता है कि अब उसे जनता या युवाओं की किसी भी बात को सुनने की कोई आवश्यकता नहीं बची है। इस मुश्किल दौर में उन्होंने हर उस निडर छात्र, कोऑर्डिनेटर और भारतीय नागरिक के साथ मजबूती से खड़े होने का ऐलान किया जो देश की गरिमा के लिए जीता है।

दमन से और मजबूत होंगी युवा आवाजें

शेखर सुमन ने उन युवा आवाजों का भी पुरजोर समर्थन किया जिन्हें अक्सर राजनीतिक फायदे के लिए ‘बदमाश’, ‘देश-विरोधी’ या ‘अयोग्य’ करार दिया जाता है। उन्होंने दृढ़ विश्वास के साथ कहा कि सत्ता या शासन इन युवाओं को जितना अधिक दबाने की कुचेष्टा करेंगे, वे उतनी ही ज्यादा शक्ति और दृढ़संकल्प के साथ वापसी करेंगे। शुरुआत में उनके मन में यह संशय जरूर था कि क्या मौजूदा उथल-पुथल के दौर में इस एपिसोड को ऑन-एयर करना चाहिए, लेकिन अंततः उन्होंने माना कि ‘शो मस्ट गो ऑन’ के सिद्धांत के तहत सच को सामने लाना उनकी बड़ी जिम्मेदारी है।

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Chandan Das

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