Shiyan-28B satellite : 3 जुलाई 2025 को चीन ने Shiyan-28B 01 उपग्रह को शिचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया। आमतौर पर उपग्रहों को लॉन्च के 24 से 48 घंटे के भीतर अंतरराष्ट्रीय ट्रैकिंग एजेंसियां पकड़ लेती हैं, लेकिन यह सैटेलाइट पूरे छह दिन तक ‘गायब’ रहा। किसी भी स्पेस ट्रैकिंग सिस्टम को यह नहीं दिखा। जब 9 जुलाई को अचानक यह फिर से ट्रैक हुआ, तो वैज्ञानिक समुदाय चौंक उठा।
9 जुलाई को अमेरिकी स्पेस फोर्स की Space Domain Awareness Unit ने Shiyan-28B को 794×796 किमी की कक्षा में ट्रैक किया। चौंकाने वाली बात ये थी कि इस सैटेलाइट की झुकाव दर (Inclination) केवल 11 डिग्री थी, जबकि लॉन्च के समय इसका अनुमानित झुकाव 35 डिग्री था।
इसका मतलब है कि इस सैटेलाइट को ले जाने वाले रॉकेट ने अपनी दिशा में तीन बार बदलाव किया— यानी तीन बार बर्न किया गया— ताकि इसकी कक्षा को बिल्कुल दक्षिण दिशा की ओर ले जाया जा सके। यह प्रक्रिया बेहद जटिल और असामान्य मानी जाती है, जिससे इस मिशन की रणनीतिक प्रकृति पर शक गहराता है।
कम झुकाव वाली यह कक्षा सीधे दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर के ऊपर से गुजरती है। ये दोनों क्षेत्र चीन की रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से बेहद अहम हैं। स्पेस एक्सपर्ट जोनाथन मैकडॉवेल का कहना है कि चीन ने पहले कभी इस तरह की कम झुकाव वाली कक्षा का प्रयोग नहीं किया है। इससे संकेत मिलता है कि इस मिशन का मकसद केवल तकनीकी परीक्षण नहीं, बल्कि निगरानी (surveillance) और संभवतः सैन्य उद्देश्यों से जुड़ा हो सकता है।
यह पहली बार नहीं है जब चीन के Shiyan सीरीज के उपग्रहों ने दुनिया का ध्यान खींचा हो। चीन का दावा है कि Shiyan उपग्रह स्पेस एनवायरनमेंट (अंतरिक्षीय पर्यावरण) का अध्ययन करने के लिए हैं, लेकिन अक्सर इनके कार्यकलाप गोपनीय और संदेहास्पद रहे हैं।
हाल ही में, Shiyan सैटेलाइट्स ने डॉकिंग ऑपरेशन किया था— जिसमें दो सैटेलाइट्स आपस में जुड़ते हैं। यह संकेत देता है कि चीन ऑर्बिटल रिफ्यूलिंग (कक्षा में ईंधन भरना) जैसी जटिल तकनीकों पर काम कर रहा है। यह तकनीक सैन्य उपग्रहों की ऑपरेशनल क्षमता और उम्र को बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
अमेरिका इस घटना को हल्के में नहीं ले रहा है। NASA और अमेरिकी रक्षा एजेंसियां Shiyan-28B की गतिविधियों पर गहरी नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन अपनी स्पेस क्षमताओं को सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों में सामरिक बढ़त के लिए तैयार कर रहा है।
चीन की स्पेस रणनीति अब केवल चंद्रमा और मंगल पर सैंपल मिशन तक सीमित नहीं रही, वह Earth’s Orbit में भी अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है। इससे वैश्विक सामरिक संतुलन पर सीधा असर पड़ सकता है।
स्पेस विशेषज्ञ मानते हैं कि इतने लंबे समय तक सैटेलाइट का ट्रैक न होना और फिर अचानक बदली हुई कक्षा में नजर आना सामान्य नहीं हो सकता। यह संकेत देता है कि चीन ने गोपनीय तरीके से मिशन का मार्ग बदला, संभवतः उपग्रह को किसी विशेष क्षेत्र पर जासूसी या निगरानी के लिए तैनात किया गया है। इस परिदृश्य में यह मिशन स्पेस वॉरफेयर (अंतरिक्ष युद्ध) के लिए तैयार की गई रणनीतिक तैयारी का हिस्सा हो सकता है।
इस घटना ने दुनिया भर में नई स्पेस रेस को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अगर एक देश इस प्रकार उपग्रहों को छिपाकर और फिर अचानक नई दिशा में तैनात कर सकता है, तो यह आने वाले समय में अंतरिक्ष में सामरिक संघर्ष की संभावना को जन्म दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब वैश्विक शक्तियों को स्पेस एग्रीमेंट्स और निगरानी तंत्रों को और सख्त करने की जरूरत है, ताकि ऐसी गतिविधियों को समय रहते रोका जा सके।
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