अंबिकापुर @thetarget365 इस साल पितृपक्ष (Shradh Paksha 2024) की शुरुआत आज से हो गई है, जो कि 02 अक्टूबर तक रहेगा। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि पितृपक्ष में पितरों की आत्मा अपने परिवार वालों को आर्शीवाद देने के लिए धरती लोक पर आती है। पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। श्राद्ध करने से पितर खुश होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
हिंदू धर्म के पुराणों में पितृपक्ष के दौरान पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करना शुभ माना जाता है। पितृपक्ष में पितरों को स्वाद और गंध के द्वारा प्रसन्न किया जाता है। इस दौरान पितरों को जल अर्पित किया जाता है। साथ ही तिल, चावल, कुश, जौ, गुड़, घी आदि कंडे को जलाकर अर्पित करते हैं। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
पितरों को जल अर्पित करने को तर्पण कहा जाता है। इस दौरान जल में थोड़ा सा काला तिल डाल लें। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके हाथों में थोड़ी सी कुश लेकर पितर का ध्यान करके धीरे-धीरे अपने अंगूठे का इस्तेमाल करके जल अर्पित करें। इसके साथ ही ‘ॐ आगच्छन्तु में पितर एवं गृह्णन्तु जलान्जलिम’ का जाप करें। इसके बाद अन्न और वस्त्र का दान करें। इसके साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
पितरों के तर्पण के अलावा भी पितृपक्ष हिंदू धर्म में बेहद खास होता है। इस दौरान पितृदोष से राहत पाने के लिए कुछ उपाय करने चाहिए। यदि आप पितृ दोष की समस्या से राहत चाहते हैं, तो पितृपक्ष में दिव्य पितृ स्तोत्र का पाठ करें। इसका पाठ करने से न सिर्फ पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि जीवन की परेशानियां भी खत्म होती हैं।