SIR Voter List 2026 : स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम नहीं आने से परेशान पुराने मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि जिन लोगों का नाम पहले वोटर लिस्ट में दर्ज था, लेकिन SIR की ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं है, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए Form-6 भर सकते हैं। केवल इस आधार पर उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी कि वे पहले से मतदाता थे और अब नया आवेदन कर रहे हैं।
चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजा पत्र
चुनाव आयोग ने मंगलवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र भेजकर इस स्थिति को स्पष्ट किया। आयोग के मुताबिक, उसके संज्ञान में आया था कि कई पुराने मतदाता Form-6 जमा करने से डर रहे हैं। उन्हें आशंका थी कि इस फॉर्म में पहली बार मतदाता बनने से संबंधित घोषणा करनी होती है, इसलिए पहले से वोटर होने के बावजूद आवेदन करना गलत घोषणा माना जा सकता है। आयोग ने अब इस भ्रम को दूर कर दिया है।

पहले वोटर होने के बावजूद क्यों भरना होगा Form-6?
आयोग ने बताया कि Form-6 में निर्धारित घोषणा 1 अगस्त 2022 से लागू है। यदि किसी पुराने मतदाता का नाम SIR के दौरान प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं मिलता है, तो उसे अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा।इसका मतलब है कि पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होना Form-6 भरने में बाधा नहीं बनेगा। पुराने मतदाता भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम दोबारा जुड़वाने की मांग कर सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी परिस्थिति में आवेदन करना अपने आप में झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा।

जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 31 के तहत नहीं होगी कार्रवाई
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 31 को लेकर आया है। दरअसल, पुराने मतदाताओं को डर था कि Form-6 में पहली बार नाम दर्ज कराने संबंधी घोषणा करने के कारण उन पर गलत जानकारी देने का आरोप लग सकता है।चुनाव आयोग ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम पहले किसी मतदाता सूची में दर्ज था और वह SIR के दौरान या उसके बाद Form-6 जमा करता है, तो केवल इसी आधार पर उसके खिलाफ धारा 31 के तहत कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी।हालांकि, आयोग ने एक जरूरी शर्त भी स्पष्ट की है। यह राहत उन मामलों में लागू होगी, जहां संबंधित व्यक्ति का नाम पहले से किसी दूसरी लोकसभा या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है और Form-6 में दी गई अन्य घोषणाएं कानून के अनुरूप हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में दिल्ली हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर के फैसले का भी उल्लेख किया है। यह मामला नीलोत्पल दत्ता एवं अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य से संबंधित था।याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई थी कि पहले से मतदाता होने के बावजूद Form-6 जमा करने पर उन्हें पहली बार वोटर बनने की गलत घोषणा करने वाला माना जा सकता है। अदालत ने इस आशंका को खारिज करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता Form-6 जमा कर सकते हैं और उनके आवेदन पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।

स्थानीय भाषाओं में भी मतदाताओं तक पहुंचाई जाएगी जानकारी
चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के CEO को निर्देश दिया है कि इस स्पष्टीकरण की जानकारी संबंधित अधिकारियों और आम मतदाताओं तक पहुंचाई जाए। इसके लिए विभिन्न प्रचार माध्यमों के साथ स्थानीय भाषाओं में भी व्यापक प्रचार करने को कहा गया है।इस फैसले से SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं पाने वाले पुराने मतदाताओं को दोबारा नाम जुड़वाने की प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।
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