Political Controversy : मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद सूबे की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस अप्रत्याशित फैसले के बाद चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है। कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए केंद्र की सत्ताधारी दल भाजपा पर तीखे हमले किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने और विपक्ष की आवाज को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

प्रियंका चतुर्वेदी का चुनाव आयोग पर निशाना और स्मृति ईरानी का जिक्र
इस पूरे राजनीतिक विवाद के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी कांग्रेस के सुर में सुर मिलाया है। मंगलवार देर रात उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद तीखी पोस्ट साझा की। प्रियंका ने सीधे तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का उदाहरण देते हुए चुनाव आयोग और भाजपा को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने चुनाव आयोग की दोहरी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां सत्तापक्ष के नेताओं की बड़ी गलतियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, वहीं विपक्ष के उम्मीदवारों के खिलाफ मामूली आधार पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

हलफनामे के बहाने दोहरे मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप
प्रियंका चतुर्वेदी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट रूप से लिखा कि बीजेपी नेता स्मृति ईरानी अपने लोकसभा चुनाव के हलफनामों में तीन अलग-अलग शैक्षणिक योग्यताएं बताकर चुनाव लड़ सकती हैं, और चुनाव आयोग उन पर आने वाली सभी शिकायतों को पूरी तरह अनदेखा कर देता है। दूसरी तरफ, कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन सिर्फ इसलिए रद्द कर दिया जाता है क्योंकि उनके हलफनामे में एक ऐसी मामूली शिकायत का जिक्र नहीं था, जिसके लिए न तो कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज हुई थी और न ही उन्हें चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखने का कोई उचित अवसर दिया गया।
भोपाल हवाई अड्डे पर विधायकों को रोकने का प्रयास और भाजपा की आपत्ति
नामांकन रद्द होने से पहले दिनभर भोपाल में भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला था। कांग्रेस पार्टी चुनाव से पहले अपनी ‘रिसॉर्ट स्टे’ रणनीति के तहत अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजने की तैयारी में थी, लेकिन भोपाल हवाई अड्डे पर ही उन्हें भारी बाधा का सामना करना पड़ा। इसी गहमागहमी के बीच, भारतीय जनता पार्टी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर एक गंभीर कानूनी आपत्ति दर्ज करा दी। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस उम्मीदवार ने तेलंगाना की एक अदालत में अपने खिलाफ लंबित एक कानूनी मामले की अहम जानकारी को जानबूझकर चुनाव आयोग से छिपाया है।
क्या है पूरा मामला और तेलंगाना अदालत की याचिका का सच
भाजपा द्वारा दायर की गई आपत्ति के अनुसार, एक पूर्व कॉर्पोरेट अधिकारी ए. श्रीलता ने नटराजन के खिलाफ हैदराबाद की एक अदालत में याचिका दायर कर रखी है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि नटराजन ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी नामक व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण दिया था, जिस पर छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने जैसे कई गंभीर आरोप हैं। हालांकि, कांग्रेस ने इस आपत्ति का पुरजोर खंडन किया है। कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने इसे भाजपा की ‘जबरन वाली राजनीति’ (फोर्स्ड पॉलिटिक्स) करार देते हुए कहा कि नटराजन के खिलाफ कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं है, उन्हें केवल अदालत का एक नोटिस मिला है।
चुनाव आयोग के दिशानिर्देश और नटराजन की राजनीतिक साजिश की दलील
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, उम्मीदवार को केवल दर्ज मुकदमों (FIR) की जानकारी का खुलासा करना होता है, न कि किसी सामान्य अदालती नोटिस का। इस पूरे घटनाक्रम पर अपना बचाव करते हुए खुद मीनाक्षी नटराजन ने इसे एक सोची-समझी ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया है। उन्होंने हैदराबाद की अदालत में श्रीलता द्वारा दायर की गई याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह सिर्फ उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि को धूमिल करने का एक दुर्भावनापूर्ण प्रयास है, जिसे कानूनन सही नहीं ठहराया जा सकता।
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