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Sneha Girpunje DSP: शहीद ASP की पत्नी बनीं DSP, स्नेहा गिरपुंजे ने पहनी वर्दी

Sneha Girpunje DSP : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए IED विस्फोट में शहीद हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) आकाश राव गिरपुंजे की पत्नी स्नेहा गिरपुंजे को राज्य सरकार ने डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी है। यह नियुक्ति मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लिए गए विशेष कैबिनेट निर्णय के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य शहीद के परिजनों को सम्मान और सरकारी सेवा में सहारा देना है।

कैसे शहीद हुए थे आकाश गिरपुंजे?

10 जून 2025 को माओवादियों द्वारा बुलाए गए भारत बंद के मद्देनजर ASP आकाश राव गिरपुंजे पैदल गश्त पर निकले थे। नक्सलियों ने इलाके में प्रेशर IED बिछाया था, जिसकी चपेट में आकर वे शहीद हो गए। यह घटना छत्तीसगढ़ में वर्ष 2009 के बाद पहली बार थी, जब कोई बड़ा पुलिस अधिकारी नक्सली हिंसा में शहीद हुआ हो। इससे पहले 2009 में राजनांदगांव के मदनवाड़ा में SP विनोद चौबे नक्सली हमले में शहीद हुए थे।

DSP के पद पर मिली अनुकंपा नियुक्ति

स्नेहा गिरपुंजे को DSP पद पर अनुकंपा नियुक्ति मिलना एक ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है। आमतौर पर अनुकंपा नियुक्ति में निचले स्तर के पद मिलते हैं, लेकिन विष्णुदेव साय कैबिनेट ने इसे “विशेष प्रकरण” मानते हुए सीधी नियुक्ति DSP पद पर दी है।

क्यों चुना पुलिस विभाग?

स्नेहा गिरपुंजे ने एक इंटरव्यू में कहा “मुझे अन्य विभागों में भी नौकरी मिल सकती थी, लेकिन मैंने पुलिस विभाग चुना क्योंकि यह विभाग मुझे मेरे साहब (आकाश गिरपुंजे) से जोड़ता है। मुझे मालूम है यह नौकरी आसान नहीं है, लेकिन मैं जानती हूं साहब मुझे कमजोर नहीं देख सकते थे। वर्दी मुझे हर दिन उनके करीब रखेगी।”

अनुकंपा नियुक्ति की शर्तें

नियुक्ति परिवीक्षाधीन होगी

अभ्यर्थी को तय प्रशिक्षण लेना और परीक्षा पास करनी होगी

चरित्र सत्यापन और चिकित्सा प्रमाण पत्र अनिवार्य

परीक्षा में बार-बार असफल होने पर सेवा समाप्त की जा सकती है

प्रशिक्षण न पूरा होने पर खर्च की गई राशि लौटानी होगी

अंशदायी पेंशन व अन्य सेवा नियम लागू होंगे

समाज के लिए प्रेरणा

स्नेहा की यह नियुक्ति न सिर्फ एक शहीद परिवार को न्याय देने का प्रतीक है, बल्कि यह उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हौसले के साथ आगे बढ़ना चाहती हैं।

यह कदम न केवल सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि शहादत बेकार नहीं जाती, और शहीदों के परिवारों को ससम्मान समाज में आगे बढ़ने का मौका दिया जाता है।

Read More: Police Smriti Diwas : छत्तीसगढ़ में ‘पुलिस स्मृति दिवस 2025, शौर्य और बलिदान को नमन

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