Solar Eclipse 2025: साल 2025 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को लगने जा रहा है। इस बार का ग्रहण आंशिक (Partial Solar Eclipse) रहेगा और भारत में दिखाई नहीं देगा। खगोलविद और आम लोग इस खगोलीय घटना को लेकर उत्साहित हैं। वहीं, धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल को अशुभ माना जाता है, जो व्यक्ति और समाज पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
21 सितंबर 2025 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण रात 10:59 बजे से लगभग 3:23 बजे तक रहेगा। इसका पीक समय रात 1:11 बजे है और कुल अवधि लगभग 4 घंटे 24 मिनट की होगी। यह ग्रहण रॉस सागर, अंटार्कटिका, न्यूजीलैंड और प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में 85% तक दिखाई देगा। भारत में इस बार ग्रहण नजर नहीं आएगा।
हिंदू शास्त्रों में ग्रहण काल को अशुभ माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ से परहेज करना चाहिए, भोजन ग्रहण करना वर्जित होता है और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। माना जाता है कि ग्रहण काल में मानसिक तनाव, भय और पारिवारिक कलह बढ़ सकते हैं। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य आत्मा और ऊर्जा का प्रतीक है, इसलिए ग्रहण के दौरान आत्मविश्वास और करियर में बाधा आ सकती है। प्राकृतिक दृष्टिकोण से, ग्रहण के समय मौसम में बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है।
बाबा वेंगा, जो एक मशहूर भविष्यवक्ता थीं, ने साल 2025 को कष्टकारी साल बताया है। उनकी भविष्यवाणियों में बीमारियों और महामारी, सामाजिक अस्थिरता, युद्ध, आर्थिक संकट और प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख है। हाल ही में कोविड महामारी ने इस भविष्यवाणी की प्रासंगिकता को बढ़ाया है। उनकी भविष्यवाणियां भय, संघर्ष और नकारात्मक बदलावों से भरी हुई हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जिसका कोई आध्यात्मिक या भविष्यवाणी से संबंध नहीं होता। वहीं, बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां प्रमाणित नहीं हैं और उनका आधार अक्सर अनुमान और अटकलें होती हैं। हालांकि, दोनों को अक्सर संकट, भय और बदलाव के संदर्भ में जोड़ा जाता है। यह मेल केवल लोगों की मानसिकता और अनिश्चितता की भावना के कारण बनता है, न कि वैज्ञानिक या प्रमाणिक तथ्य की वजह से।
साल 2025 का सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक घटना है, जो खगोल विज्ञान के अनुसार निश्चित समय पर घटित होती है। जबकि धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं इसे अशुभ मानती हैं, बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां इस ग्रहण से सीधे जुड़ी नहीं हैं। हालांकि, वैश्विक हालात और प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए, कई लोग इन दोनों को जोड़कर सोचते हैं। हमें चाहिए कि वैज्ञानिक तथ्यों को समझें और अंधविश्वास से बचें।
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