Somalia Torn Currency
Somalia Torn Currency : इंटरनेट की दुनिया में इन दिनों एक बेहद हैरान करने वाला वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। इस वीडियो में एक दर्जी अपनी सिलाई मशीन से कागज के फटे-पुराने नोटों को बड़ी बारीकी से सिलता हुआ दिखाई दे रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह दृश्य अफ्रीकी देश सोमालिया का है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग इसे साझा करते हुए लिख रहे हैं कि सोमालिया की अर्थव्यवस्था इतनी बदहाल हो चुकी है कि वहां 1991 के बाद से नए नोट नहीं छापे गए हैं, जिसके कारण लोग फटे हुए नोटों को सिलकर काम चलाने पर मजबूर हैं। इस दावे ने दुनिया भर के नेटिजन्स को अचंभे में डाल दिया है, लेकिन क्या वाकई सोमालिया की हकीकत यही है?
जब इस दावे की गहराई से पड़ताल की गई, तो कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। यह बात ऐतिहासिक रूप से सही है कि सोमालिया में 1991 के बाद से आधिकारिक मुद्रा की छपाई में भारी व्यवधान आया है। 1991 में सियाद बर्रे की सरकार गिरने और उसके बाद शुरू हुए भीषण गृहयुद्ध के कारण सोमालिया के सेंट्रल बैंक ने आधिकारिक तौर पर नए ‘सोमाली शिलिंग’ छापना बंद कर दिया था। वर्तमान में बाजार में जो कागजी मुद्रा मौजूद है, वह या तो तीन दशक पुरानी है या फिर विभिन्न स्थानीय गुटों द्वारा अवैध और अनौपचारिक रूप से छपवाई गई थी। इस लिहाज से नोटों की भौतिक स्थिति बेहद जर्जर होना स्वाभाविक है।
यहीं पर वायरल वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक साबित होता है। हालांकि नोटों की हालत खराब है, लेकिन सोमालिया के लोग अब उन पर निर्भर नहीं हैं। वास्तविकता यह है कि सोमालिया वर्तमान में दुनिया की सबसे उन्नत ‘मोबाइल मनी इकोनॉमी’ (Advanced Mobile Money Economy) में से एक बनकर उभरा है। गृहयुद्ध और बैंकिंग सिस्टम की विफलता के बाद वहां के नागरिकों ने तकनीक को अपनाया। आज सोमालिया में एक छोटी सी चाय की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, हर जगह भुगतान के लिए ZAAD, e-Dahab और Sahal जैसे मोबाइल ऐप्स का उपयोग किया जाता है। ‘नेक्स्टबिलियन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2018 तक ही सोमालिया के शहरी इलाकों में 80% से अधिक लोग डिजिटल ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल करने लगे थे।
विशेषज्ञों और स्थानीय रिपोर्ट्स का मानना है कि वायरल वीडियो में नोट सिलने का दृश्य सोमालिया की मुख्य अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। कुछ बेहद दूरदराज के गरीब इलाकों में मामूली लेनदेन के लिए फटे नोट चलाने की कोशिशें जरूर की जाती हैं, लेकिन यह वहां की सामान्य जीवनशैली नहीं है। अक्सर ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर ‘व्यूज’ और ‘अटेंशन’ पाने के लिए बनाए जाते हैं। सोमालिया अब नकदी आधारित समाज (Cash-based Society) से निकलकर एक कैशलेस समाज की ओर तेजी से बढ़ चुका है, जहाँ स्मार्टफोन के जरिए किया जाने वाला भुगतान ही सबसे प्रचलित और विश्वसनीय माध्यम है।
अंततः, वायरल दावे की पड़ताल से यह स्पष्ट होता है कि वीडियो आंशिक सत्य और अधिक भ्रामक जानकारी का मिश्रण है। सोमालिया में नए नोट नहीं छपे हैं, यह सच है, लेकिन वहां के लोग नोट सिलकर अपना जीवन नहीं चला रहे हैं। सोमालिया ने अपनी वित्तीय समस्याओं का समाधान डिजिटल करेंसी के रूप में खोज लिया है। इसलिए, इस वीडियो को सोमालिया की संपूर्ण अर्थव्यवस्था की बदहाली का प्रतीक मानना गलत होगा। यह वीडियो महज एक अपवाद या सोशल मीडिया स्टंट हो सकता है, जबकि असल सोमालिया अब मोबाइल वॉलेट की ताकत पर टिका हुआ है।
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