Sonam Wangchuk Statement: प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपनी लंबी भूख हड़ताल को आखिरकार देर रात समाप्त कर दिया है। केंद्र सरकार की तरफ से सकारात्मक लिखित प्रस्ताव और ठोस आश्वासन मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ने का यह बड़ा निर्णय लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की, जिसके बाद उनका अनशन सफलतापूर्वक समाप्त करवाया गया। सोनम ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अनशन तोड़ने का यह कदम कई दौर की लंबी बातचीत, कड़े विचार-विमर्श और देश में संभावित अप्रिय स्थितियों या हिंसा को टालने के उद्देश्य से उठाया है।
सरकार से लिखित आश्वासन मिलने पर साझा की पूरी जानकारी
अनशन खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने अपना एक विस्तृत वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि आज उनके अनशन का 26वां दिन था। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों के अलावा लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेता भी अस्पताल पहुंचे थे। इससे पहले देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात कर अनशन समाप्त करने का सामूहिक आग्रह किया था और अपने हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपा था। सांसदों ने उन्हें पूरा भरोसा दिलाया था कि वे संसद के आगामी सत्र में नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर पुरजोर तरीके से व्यापक चर्चा करेंगे।
सरकार द्वारा दिए गए प्रमुख वादों का किया खुलासा
अपने वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने विस्तार से बताया कि सरकार की ओर से उन्हें कौन-कौन से मुख्य आश्वासन लिखित रूप में मिले हैं। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी राहत यह है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों या गत 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल होने वाले किसी भी युवा के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कानूनी कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। इसके अलावा, हालिया पेपर लीक और इस पूरे घटनाक्रम में जान गंवाने वाले 20 से अधिक छात्रों के पीड़ित परिवारों को उचित वित्तीय मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संसद में पूरी चर्चा होगी।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के सवाल पर रखी अपनी स्पष्ट राय
जब सोनम वांगचुक से यह सवाल पूछा गया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर क्या समझौता हुआ है, तो उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें इस बात पर कोई भी लिखित आश्वासन नहीं दे पाई कि मंत्री का इस्तीफा कब तक होगा। उनके सामने दो विकल्प थे या तो वे अपनी जिद पर अड़े रहते और कई हफ्तों तक अनशन जारी रखते जिससे उनकी जान खतरे में पड़ सकती थी। समर्थकों की अपील को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जीवित रहकर संघर्ष जारी रखने को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो इससे जनता का नहीं बल्कि सरकार का ही राजनीतिक नुकसान होगा।
छात्रों का भविष्य और लोकतांत्रिक बहस को बताया सबसे अहम
सोनम वांगचुक ने अंत में जोर देकर कहा कि उनके लिए किसी व्यक्ति का इस्तीफा ही एकमात्र सबसे महत्वपूर्ण विषय नहीं था, क्योंकि यह राजनीतिक मुद्दा अपने समय के साथ हल हो जाएगा। उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता यह थी कि देश के मासूम बच्चों और छात्रों का भविष्य किसी भी फर्जी कानूनी मामले या एफआईआर के चक्कर में बर्बाद न हो। उन्होंने संतोष जताया कि उन्होंने सरकार से छात्रों की सुरक्षा की गारंटी हासिल कर ली है। देश के लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर यानी हमारी संसद में इस पूरे मामले पर गंभीर बहस होगी, जिसके लिए उन्होंने आंदोलन का समर्थन करने वाले सभी देशवासियों का हृदय से आभार व्यक्त किया है।
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