Soybean Price Hike
Soybean Price Hike: पिछले कई महीनों से कम कीमतों और आर्थिक नुकसान की मार झेल रहे सोयाबीन किसानों के लिए साल 2026 की शुरुआत बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्यों—मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की मंडियों में सोयाबीन की कीमतें अब न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आंकड़े को पार कर गई हैं। फरवरी 2026 में सोयाबीन का औसत थोक भाव करीब 5,774 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है। यह तेजी केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में सुधार देखा जा रहा है, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।
सोयाबीन की कीमतों में यह सुधार अचानक नहीं हुआ है, बल्कि पिछले तीन महीनों से बाजार में सकारात्मक रुझान बना हुआ है। आंकड़ों पर नजर डालें तो दिसंबर 2025 में सोयाबीन की औसत कीमत लगभग 4,790 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो जनवरी 2026 में बढ़कर 5,054 रुपये तक पहुंची। फरवरी आते-आते यह तेजी और निर्णायक हो गई और भाव 5,328 रुपये के ऊपर टिक गए। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) के अनुसार, सोयाबीन की खेती की लागत (A2+FL) लगभग 3,552 रुपये प्रति क्विंटल है। इस लिहाज से मौजूदा मंडी भाव किसानों को न केवल लागत निकाल कर दे रहे हैं, बल्कि एक संतोषजनक मुनाफा (मार्जिन) भी सुनिश्चित कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश, जिसे ‘सोया स्टेट’ कहा जाता है, वहां की प्रमुख मंडियों में सोयाबीन की आवक के साथ-साथ कीमतों में जबरदस्त मजबूती देखी जा रही है। 6 फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, सीहोर जिले की आष्टा मंडी में सोयाबीन 5,800 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर बिका। वहीं, राजगढ़ की खिलचीपुर मंडी में भाव 5,740 रुपये और देवास मंडी में 5,697 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किए गए। उज्जैन की महिदपुर मंडी और रतलाम की ताल मंडी में भी औसत भाव 5,600 से 5,700 रुपये के बीच बने हुए हैं, जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहे हैं।
महाराष्ट्र की मंडियों में भी सोयाबीन की कीमतों में जोरदार चमक दिखाई दे रही है। 5 फरवरी 2026 को दर्ज किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वाशिम मंडी में भाव 5,900 रुपये के उच्च स्तर को छू गए। अकोला मंडी में पीली सोयाबीन का औसत भाव 5,580 रुपये रहा, जबकि अधिकतम भाव 5,900 रुपये तक दर्ज किया गया। बुलढाणा और बीड की मंडियों में भी किसानों को 5,500 रुपये से ऊपर के दाम मिल रहे हैं। अहमदनगर की जामखेड़ मंडी और धाराशिव की मुरुम मंडी में भी कीमतें एमएसपी के काफी ऊपर बनी हुई हैं, जिससे राज्य के लाखों किसानों को पिछले घाटे से उबरने में मदद मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोयाबीन की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे वैश्विक स्तर पर खाद्य तेलों की मांग में बढ़ोतरी और घरेलू स्तर पर संतुलित आपूर्ति प्रमुख कारण हैं। किसानों ने इस बार अपनी उपज को रोक-रोक कर बाजार में लाया है, जिससे मंडियों में एकदम से दबाव नहीं बना और भावों को मजबूती मिली। यदि बाजार का रुख ऐसा ही बना रहता है, तो आने वाले हफ्तों में कीमतों में और भी सुधार की संभावना जताई जा रही है। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों के जीवन स्तर को सुधारने में भी सहायक सिद्ध होगी।
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