Speaker Tea Party Parliament: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे टकराव और आरोप-प्रत्यारोप के बाद, सत्र के समापन पर एक सुखद और मानवीय तस्वीर सामने आई। लोक सभा अध्यक्ष द्वारा आयोजित पारंपरिक ‘चाय पार्टी’ में इस बार वैचारिक मतभेदों को पीछे छोड़कर दोनों पक्षों के नेता एक साथ बैठे नजर आए। पिछली बार जहाँ विपक्ष ने इस आयोजन का बहिष्कार किया था, वहीं इस बार विपक्षी नेताओं की मौजूदगी ने संसद के गलियारों में सद्भाव की नई लहर पैदा की।
Speaker Tea Party Parliament: सदन के तीखे माहौल को हल्का करती चाय की परंपरा
संसद के हर सत्र के समापन पर स्पीकर के कक्ष में सभी दलों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित करना एक पुरानी और स्वस्थ परंपरा है। इसका मुख्य उद्देश्य सदन के भीतर होने वाले वार-पलटवार और हंगामे से उपजे तनाव को कम करना होता है। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की अपनी व्यस्त विदेश यात्रा से लौटने के तुरंत बाद इसमें शामिल हुए। वहीं, राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस की ओर से उनकी बहन और वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने पार्टी की नुमाइंदगी की।
Speaker Tea Party Parliament: प्रियंका गांधी और पीएम मोदी के बीच दिलचस्प बातचीत
करीब बीस मिनट तक चली इस अनौपचारिक बैठक में कई हल्के-फुल्के क्षण देखने को मिले। सूत्रों के अनुसार, प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री से उनकी हालिया विदेश यात्रा के बारे में पूछा, जिस पर पीएम ने यात्रा को बहुत सफल बताया। बातचीत के दौरान वायनाड का जिक्र आने पर माहौल और भी दोस्ताना हो गया। प्रियंका ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पीएम को बताया कि वे वायनाड की एक विशेष जड़ी-बूटी का सेवन करती हैं, जिससे उन्हें एलर्जी की समस्या नहीं होती। इस बात पर पीएम और राजनाथ सिंह मुस्कुराते नजर आए।
जब सेंट्रल हॉल और ‘रिटायरमेंट’ पर लगे ठहाके
बैठक के दौरान विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री के सामने एक महत्वपूर्ण सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि नए संसद भवन में भी पुराने भवन के ‘सेंट्रल हॉल’ जैसा एक साझा कक्ष होना चाहिए, जहाँ सभी सांसद अनौपचारिक रूप से मिल सकें। फिलहाल नए भवन में सांसद केवल कैंटीन में ही मिल पाते हैं। जब सांसदों ने पुराने सेंट्रल हॉल (अब संविधान सदन) के उपयोग की बात की, तो पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा, “वह स्थान तो रिटायरमेंट के बाद के लिए है, अभी तो आप सभी को देश की बहुत सेवा करनी है।” इस टिप्पणी पर पूरे कक्ष में ठहाके गूंज उठे।
सत्र की अवधि और विधेयकों पर चर्चा
कुछ नेताओं ने शीतकालीन सत्र की छोटी अवधि पर सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के छोटे सत्र का उदाहरण दिया, जिस पर पीएम ने हरियाणा और यूपी की तुलना करते हुए राजनीतिक चर्चा को रोचक बना दिया। विपक्ष का तर्क था कि सत्र छोटा होने के कारण ‘जी राम जी’ जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए सदन को देर रात तक बैठना पड़ा। इस पर पीएम ने मजाकिया लहजे में कहा कि सत्र छोटा होने का एक फायदा यह रहा कि नारेबाजी कम हुई और सांसदों के गलों को ज्यादा तकलीफ नहीं हुई।
विपक्ष की तैयारी और ‘कंप्यूटर बाबा’ की शिकायत
प्रधानमंत्री ने सदन में एन.के. रामचंद्रन जैसे विपक्षी सांसदों की प्रशंसा की, जो पूरी तैयारी के साथ बहस में हिस्सा लेते हैं। वहीं, कुछ सांसदों ने ‘शून्य काल’ (Zero Hour) में मौका न मिलने की बात उठाई। जब स्पीकर ने कहा कि वे निष्पक्ष रहते हैं, तो सांसदों ने हंसते हुए कहा कि उनकी शिकायत स्पीकर से नहीं बल्कि उस ‘कंप्यूटर बाबा’ (सॉफ्टवेयर) से है जो लॉटरी के जरिए नाम तय करता है।संसद की यह चाय पार्टी लोकतंत्र की उस खूबसूरती को दर्शाती है जहाँ राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और शिष्टाचार जीवित रहता है। यह आयोजन संदेश देता है कि सदन की कार्यवाही कितनी भी हंगामेदार क्यों न हो, संवाद का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए।
















