Stock Market Crash : 22 सितंबर 2025 भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन माना जा रहा था क्योंकि इसी दिन से देश में जीएसटी 2.0 लागू हो गया। घरेलू सामानों के साथ-साथ कारें, इन्श्योरेंस पॉलिसीज़ आदि की कीमतें घटने की उम्मीद थी, जिससे शेयर बाजार में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता था। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा शुल्क बढ़ाने की घोषणा ने बाजार का सारा मिजाज बिगाड़ दिया।
शेयर बाजार खुलने के सिर्फ दो मिनट के अंदर ही सेंसेक्स में 475 अंकों की भारी गिरावट आई। इसके कारण निवेशकों को करीब 1.50 लाख करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा। ट्रंप के इस फैसले का असर खासतौर पर देश की आईटी कंपनियों पर पड़ा है, क्योंकि अब इन कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए इमिग्रेशन शुल्क के रूप में ज्यादा भुगतान करना होगा। इससे विदेशी जमीन पर इन कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जो उनके मुनाफे पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के शेयर 2.23 फीसदी नीचे आए, जबकि इंफोसिस के शेयरों में 2.07 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। टेक महिंद्रा के शेयरों में 4 फीसदी से अधिक की गिरावट देखी गई, वहीं एचसीएल टेक का शेयर भी लगभग 2 फीसदी नीचे कारोबार करता रहा। इसके विपरीत, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में खासा बदलाव नहीं देखा गया और यह फ्लैट ट्रेड करता रहा।
सोमवार सुबह 9:17 बजे सेंसेक्स 475 अंकों की गिरावट के साथ 82,151.07 के स्तर पर पहुंच गया था, जो दिन का सबसे निचला स्तर था। इसके बाद थोड़ा सुधार हुआ और 9:32 बजे सेंसेक्स 175.71 अंकों की गिरावट के साथ 82,450.52 पर कारोबार कर रहा था। शुक्रवार को भी सेंसेक्स गिरावट के साथ 82,626.23 पर बंद हुआ था।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का प्रमुख सूचकांक निफ्टी भी गिरावट में था। बाजार खुलते ही निफ्टी 115.45 अंकों की गिरावट के साथ 25,211.60 पर पहुंच गया था। हालांकि बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली और 9:35 बजे निफ्टी 22 अंकों की गिरावट के साथ 25,301.85 के स्तर पर था।
जब सेंसेक्स अपने दिन के लोअर लेवल पर था, तब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 4,64,76,608.46 करोड़ रुपए था, जबकि शुक्रवार को यह 4,66,32,723.37 करोड़ रुपए था। इस हिसाब से सिर्फ दो मिनट में निवेशकों को करीब 1,56,114.91 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
H-1B वीजा शुल्क वृद्धि के चलते आईटी कंपनियों की लागत बढ़ने की संभावना ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर वे कंपनियां जो अमेरिका में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं, उन्हें ज्यादा खर्च उठाना पड़ सकता है। इससे उनके मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा और स्टॉक मार्केट में अस्थिरता बनी रहेगी। हालांकि, जीएसटी 2.0 लागू होने से घरेलू बाजार में दीर्घकालीन सुधार की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन फिलहाल अमेरिका के फैसले ने बाजार का मिजाज खराब कर दिया है।
Read More : Typhoon Ragasa: भयंकर सुपर टाइफून रगासा की दस्तक: 5 देशों में इमरजेंसी और हाई अलर्ट जारी
Sabarimala Case: उच्चतम न्यायालय ने सबरीमाला मंदिर सहित देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं…
Arvind Kejriwal News: दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने एक कड़ा रुख अपनाते…
SC on EC Appointment: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार, 14 मई 2026 को मुख्य…
BCI Action: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकील की पोशाक में कलकत्ता…
MI New Captain: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के सीजन में मुंबई इंडियंस (MI) की…
NEET UG 2026 Leak: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पेपर लीक मामले में केंद्रीय…
This website uses cookies.