Strait of Hormuz Crisis
Strait of Hormuz Crisis: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है, जिससे मध्य-पूर्व के सामरिक समुद्री रास्ते खतरनाक युद्ध के मैदान में तब्दील हो गए हैं। पिछले 48 घंटों के भीतर ओमान और फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए सिलसिलेवार हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्तब्ध कर दिया है। इन हमलों में अत्याधुनिक मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से जहाजों का आवागमन लगभग ठप पड़ गया है। नाविकों की सुरक्षा अब भगवान भरोसे है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महामंदी के काले बादल मंडराने लगे हैं।
ताज़ा सैन्य खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ घंटों में 3 से 8 के बीच वाणिज्यिक जहाजों को बेरहमी से निशाना बनाया गया है। इन जहाजों में विशाल तेल टैंकर और आवश्यक वस्तुओं से लदे कंटेनर जहाज शामिल हैं। हमलों के लिए केवल मिसाइलें ही नहीं, बल्कि विस्फोटक ‘ड्रोन बोट’ का भी उपयोग किया गया है, जो पानी की सतह पर चुपके से आकर जहाजों से टकरा जाती हैं। इन हमलों में कम से कम एक नाविक की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हैं। चालक दल के सदस्यों के बीच व्याप्त खौफ ने वैश्विक समुद्री व्यापार जगत में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) यहीं से गुजरता है। वर्तमान युद्ध की स्थिति ने इस ‘चोक पॉइंट’ को लगभग बंद कर दिया है। हमलों के डर से जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे गिर गई है, जो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों के लिए एक बड़ा झटका है। ‘मार्सक’ और ‘हैपैग-लॉयड’ जैसी दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों को इस खतरनाक रास्ते से भेजने पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे सप्लाई चेन टूटने का खतरा पैदा हो गया है।
समुद्र में खतरा केवल बारूद और मिसाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह ‘डिजिटल युद्ध’ का रूप ले चुका है। समुद्री खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया है कि इस क्षेत्र में ‘जीपीएस और एआईएस जैमिंग’ ने नेविगेशन सुरक्षा को पूरी तरह असुरक्षित बना दिया है। लगभग 1,100 से अधिक जहाजों ने इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप की शिकायत की है, जिससे उनके रडार सिस्टम में जहाज की गलत लोकेशन दिखाई दे रही है। यह तकनीकी हमला स्थिति को और भी पेचीदा बना रहा है, क्योंकि अब जहाज के कप्तान अपने आधुनिक उपकरणों पर भरोसा करने से डर रहे हैं, जिससे जहाजों के आपस में टकराने का जोखिम बढ़ गया है।
युद्ध के बढ़ते खतरों के कारण अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों ने ईरानी जलक्षेत्र और फारस की खाड़ी में जहाजों को कवर देना बंद कर दिया है। बिना इंश्योरेंस के समुद्र में उतरना जहाज मालिकों के लिए नामुमकिन है। इसके परिणामस्वरूप, अब जहाजों को अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ वाले लंबे रास्ते से घूमकर जाना पड़ रहा है। इस वैकल्पिक मार्ग के कारण यात्रा का समय 10 से 15 दिन बढ़ गया है और ईंधन की खपत में भारी वृद्धि हुई है। अंततः, माल ढुलाई की लागत (Freight Cost) में हुए इस भारी इजाफे का बोझ वैश्विक उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर ने इस पूरे समुद्री क्षेत्र के खतरे के स्तर को बढ़ाकर अब ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में डाल दिया है। अमेरिकी नौसेना ने एक विशेष एडवाइजरी जारी कर सभी कप्तानों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी सैन्य गतिविधि से कम से कम 30-नॉटिकल-मील की दूरी बनाए रखें। इसके साथ ही, सभी नेविगेशन इनपुट को मैन्युअल रूप से और रडार के जरिए दोबारा क्रॉस-वेरिफाई करने की सलाह दी गई है। वर्तमान स्थिति संकेत दे रही है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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