Hormuz Crisis
Hormuz Crisis: पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से वापसी का रास्ता बेहद कठिन नजर आता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ओर भारी गोलाबारी और बमबारी के बीच इस युद्ध के जल्द समाप्त होने की संभावना जताई है, वहीं दूसरी ओर धरातल पर स्थितियां इसके बिल्कुल उलट हैं। मंगलवार को एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान की राजधानी तेहरान पर बमबारी की। यह हमला उस समय हुआ जब ट्रंप पहले ही सार्वजनिक रूप से दावा कर चुके थे कि वे ईरान पर सीधा प्रहार नहीं करेंगे। इस विरोधाभास ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक घोषणा करते हुए ईरान के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की समय-सीमा में विस्तार किया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ईरानी पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचों पर हमला करने से पहले अगले 5 दिनों तक प्रतीक्षा करेगा। इस पांच दिवसीय मोहलत का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी दूतों को एक प्रभावशाली और ‘सम्मानित’ ईरानी नेता के साथ गुप्त वार्ता करने का अवसर प्रदान करना है। ट्रंप की इस घोषणा का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तत्काल प्रभाव पड़ा है; कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया और सोमवार को वित्तीय बाजारों में कुछ राहत की लहर देखी गई।
जंग को रोकने के दावों के बीच वाशिंगटन और तेहरान के आधिकारिक बयानों में जमीन-आसमान का अंतर नजर आ रहा है। ट्रंप का दावा है कि उनकी सरकार तेहरान के साथ ‘उत्पादक बातचीत’ कर रही है, जिससे युद्ध विराम की संभावनाएं प्रबल हुई हैं। इसके विपरीत, ईरान ने स्पष्ट रूप से अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत से इनकार कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक उनकी बुनियादी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे वार्ता की मेज पर नहीं आएंगे। ईरान के सांसदों ने भी ट्रंप के बयानों को ‘भ्रामक’ करार देते हुए जनता को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
28 फरवरी से शुरू हुए इस विनाशकारी युद्ध ने अब तक अपार मानवीय क्षति पहुंचाई है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, ईरान में अब तक 1500 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि लेबनान में यह संख्या 1000 के पार पहुंच गई है। सैन्य मोर्चे पर, इजरायल के 15 और अमेरिका के 13 सैनिकों के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि हुई है। मौतों के भयावह आंकड़ों के अलावा, लेबनान और ईरान में लाखों नागरिक अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं, जिससे क्षेत्र में एक बड़ा मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है।
फिलहाल युद्ध के थमने के आसार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं। इजरायल ने मंगलवार को एक बार फिर संभावित ईरानी मिसाइल हमले की चेतावनी जारी की है, जो मंगलवार आधी रात के बाद से अब तक की छठी चेतावनी है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए रूस, तुर्की, पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के अपने समकक्षों से निरंतर संपर्क साध रहे हैं। ट्रंप की शांति की उम्मीदों और धरातल पर जारी विध्वंसक हमलों के बीच, पूरी दुनिया की नजरें अब उन अगले 5 दिनों पर टिकी हैं, जो इस युद्ध का भविष्य तय करेंगे।
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