Madvi Hidma Village Puvarti: आमतौर पर बच्चों के मनोरंजन के लिए बनाए गए पार्कों में आपने रंग-बिरंगे झूले और फिसलपट्टी देखी होगी, लेकिन छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में एक ऐसा पार्क तैयार किया गया है जो रोमांच और साहस की नई परिभाषा लिख रहा है। बीजापुर-सुकमा सीमा पर स्थित पुवर्ती गांव के सीआरपीएफ (CRPF) कैंप में एक “आईईडी और बीजीएल पार्क” बनाया गया है। सीआरपीएफ की 150वीं बटालियन द्वारा तैयार यह पार्क नक्सली हिंसा के खिलाफ सुरक्षा बलों की जीत का एक जीवंत दस्तावेज है। यहाँ मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि नक्सलियों से बरामद किए गए घातक आईईडी, पाइप बम और बीजीएल गोले सहेजकर रखे गए हैं, जो बस्तर की बदलती तस्वीर को बयां करते हैं।
लाल आतंक के अभेद्य किले में सुरक्षा बलों की ऐतिहासिक दस्तक
15 फरवरी 2024 का दिन बस्तर के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब माओवादियों के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकाने ‘पुवर्ती’ में सीआरपीएफ कैंप स्थापित किया गया। यह इलाका दशकों तक नक्सलियों का मुख्यालय माना जाता रहा, जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। कैंप निर्माण के समय बौखलाए नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर भीषण हमला किया, लेकिन जवानों की रणनीति और अदम्य साहस के आगे उन्हें पैर पीछे खींचने पड़े। मुठभेड़ के बाद सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों को भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मिली, जिसे नष्ट करने के बजाय सुरक्षा बलों ने एक अनोखे पार्क के रूप में प्रदर्शित करने का निर्णय लिया।
पार्क में कैद है नक्सली साजिशों का काला सच
कैंप परिसर के भीतर बना यह “आईईडी एंड बीजीएल पार्क” आतंक की उस भयावहता को दिखाता है, जिसका सामना जवान और ग्रामीण रोज करते हैं। इस पार्क में नक्सलियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 11 बीजीएल सेल, शक्तिशाली पाइप बम, घातक स्पाइक होल्स और बीजीएल मैकेनिज्म के कई जटिल पुर्जे सुरक्षित तरीके से रखे गए हैं। यह पार्क न केवल नए रंगरूटों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कार्य करता है, बल्कि आम नागरिकों को भी यह समझाता है कि नक्सली किस तरह निर्दोष लोगों को निशाना बनाने की साजिश रचते हैं। संभवतः पूरे भारत में किसी सक्रिय नक्सल क्षेत्र में यह अपनी तरह का एकमात्र संग्रहालय है।
हिड़मा के अंत के साथ टूटा आतंक का तिलस्म
पुवर्ती गांव की पहचान लंबे समय तक कुख्यात नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा के कारण रही है। हिड़मा, जो CPI माओवादी की सबसे हिंसक इकाई ‘PLGA बटालियन नंबर-01’ का नेतृत्व करता था, कई राज्यों में आतंक का पर्याय बना हुआ था। वर्षों की तलाश के बाद, 19 अक्टूबर 2025 को आंध्र प्रदेश के मारेडपल्ली के जंगलों में एक बड़ी मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने हिड़मा को ढेर कर दिया। उसके खात्मे के बाद पुवर्ती और आसपास के इलाकों में नक्सली प्रभाव तेजी से कम हुआ है और ग्रामीण अब बिना किसी डर के मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं।
बंदूक की गूँज की जगह अब विकास की नई इबारत
आज पुवर्ती की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। जहाँ कभी केवल बंदूकों का साया था, अब वहाँ पक्की सड़कें, पुल, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँच रही हैं। सीआरपीएफ कैंप केवल सुरक्षा का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि यहाँ ‘गुरुकुल’ की तर्ज पर बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों का मुफ्त इलाज हो रहा है। पुवर्ती का यह सफर आतंक के अंधेरे से विकास के उजाले की ओर बढ़ने की एक प्रेरक कहानी है। यह आईईडी पार्क हमें याद दिलाता है कि शांति की कीमत क्या है और कैसे सुरक्षा बलों ने अपने लहू से इस क्षेत्र में खुशहाली के द्वार खोले हैं।
















