Sunita Williams India Visit
Sunita Williams India Visit: भारत यात्रा पर आईं सुप्रसिद्ध अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने मंगलवार को दिल्ली में एक ऐसा पल साझा किया, जिसने देशवासियों की आंखों को नम कर दिया। विलियम्स ने दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की 90 वर्षीय मां, संयोगिता चावला से मुलाकात की। दिल्ली के ‘अमेरिकन सेंटर’ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही सत्र समाप्त हुआ, सुनीता मंच से उतरकर सीधे पहली कतार में बैठीं संयोगिता जी के पास पहुंचीं और उन्हें बेहद गर्मजोशी से गले लगा लिया। नीले रंग के अपने सिग्नेचर एस्ट्रोनॉट सूट में सजी सुनीता और भावुक संयोगिता चावला के बीच का यह आलिंगन केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं था, बल्कि यह अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास की दो महान विरासत का संगम था।
कल्पना चावला भारत में जन्मीं पहली महिला अंतरिक्ष यात्री थीं, जिन्होंने दुनिया भर की लड़कियों को सितारों को छूने का सपना देखना सिखाया। दुर्भाग्यवश, फरवरी 2003 में ‘कोलंबिया’ अंतरिक्ष शटल के पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश के दौरान हुए हादसे में चालक दल के सात सदस्यों के साथ उनकी मृत्यु हो गई थी। इस दुखद घटना ने पूरे भारत को शोक में डुबो दिया था। सुनीता विलियम्स ने उसी विरासत को आगे बढ़ाया और कल्पना चावला की यादों को हमेशा जीवित रखा। कार्यक्रम में सुनीता ने कल्पना की बहन दीपा से भी मुलाकात की और भविष्य में संपर्क में रहने का वादा किया।
60 वर्षीय सुनीता विलियम्स ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि उनके लिए भारत आना किसी ‘घर वापसी’ से कम नहीं है। उनके पिता, दीपक पंड्या, मूल रूप से गुजरात के मेहसाणा जिले के झुलासन गांव के रहने वाले थे, जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी पंड्या स्लोवेनियाई मूल की थीं। 19 सितंबर 1965 को ओहायो में जन्मी सुनीता ने अमेरिकी नौसेना में कप्तान के रूप में सेवाएं दीं और अंतरिक्ष में कई कीर्तिमान स्थापित किए। भारत के प्रति उनका प्रेम उनके शब्दों में झलकता है, जहाँ वे अपने पिता की जन्मभूमि को अपना दूसरा घर मानती हैं।
मुलाकात के बाद संयोगिता चावला ने बेहद भावुक होकर पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि 2003 के हादसे के बाद सुनीता विलियम्स ने उनके परिवार को जो सहारा दिया, उसे वे कभी नहीं भूल सकतीं। संयोगिता जी ने कहा, “वह (सुनीता) हमारे परिवार के सदस्य जैसी हैं। कोलंबिया हादसे के बाद वह तीन महीनों तक लगातार हमारे घर आती रहीं और सुबह से रात तक रुककर हमें सांत्वना दी।” उन्होंने यह भी साझा किया कि कल्पना और सुनीता अक्सर एक-दूसरे को अंतरिक्ष मिशनों के लिए प्रेरित किया करती थीं।
अपनी बेटी के जीवन को याद करते हुए संयोगिता चावला ने बताया कि कल्पना के लिए ‘मानवता’ ही एकमात्र धर्म था। जब भी उनसे उनके धर्म के बारे में पूछा जाता था, तो कल्पना का एक ही जवाब होता था— “मेरा धर्म कर्म है।” उन्होंने अपनी बेटी के हर सपने को पूरा करने में उसे भरपूर समर्थन दिया। सुनीता विलियम्स की यह भारत यात्रा 22 जनवरी से केरल साहित्य महोत्सव (KLF) के नौवें संस्करण में उनकी भागीदारी के साथ जारी रहेगी, जहाँ वे युवाओं को अपने अनुभवों से प्रेरित करेंगी।
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