Superstition Child Murder : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां अंधविश्वास की अंधी गलियों में भटकते एक व्यक्ति ने अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए मासूम की बलि चढ़ा दी। 3 वर्षीय नाबालिग बच्चे की गला रेतकर निर्मम हत्या करने वाले इस हैवान को करीब एक वर्ष बाद सामरीपाठ पुलिस ने गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। आरोपी ने न सिर्फ बच्चे को मिठाई और बिस्किट का लालच देकर अपने घर बुलाया, बल्कि लोहे की छुरी से उसकी नृशंस हत्या करने के बाद शव को जलाकर सिर को जमीन में दफना दिया था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर बच्चे का सिर बरामद कर लिया है।
प्रार्थी बिरेन्द्र नगेसिया निवासी सुलुंगडीह ने 6 अप्रैल 2024 को थाना सामरीपाठ में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका 3 वर्षीय पुत्र अजय नगेसिया 1 अप्रैल को झलबासा जंगल में खेलते-खेलते लापता हो गया। बच्चे की गुमशुदगी पर पुलिस ने धारा 363 के तहत मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की।
जांच के दौरान आरोपी राजू कोरवा (40 वर्ष), निवासी कटईडीह, थाना चांदो, पर संदेह गहराया। पूछताछ में शुरू में गुमराह करने के बाद जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो आरोपी ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि उसका बड़ा बेटा मिर्गी और मानसिक बीमारी से ग्रसित है। अंधविश्वास के चलते उसे यह भ्रम हो गया था कि “महादानी देवता” को मानव बलि देने से उसका बेटा ठीक हो जाएगा। इसी सोच ने उसे हैवान बना दिया।
आरोपी ने बताया कि उसने 3 साल के मासूम अजय को अकेले पाकर मिठाई का लालच दिया और अपने घर ले गया, जहां उसने लोहे की छुरी से गला काटकर उसकी हत्या कर दी। शव को बोरा में भरकर नाले के पास जलाया और सिर को घर में तीन दिन तक छिपाकर रखा। बाद में सिर को कपड़े में लपेटकर 2 फीट गड्ढा खोदकर दफना दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव के अवशेष और हत्या में प्रयुक्त छुरी बरामद कर ली है।
थाना सामरीपाठ में आरोपी राजू कोरवा के खिलाफ धारा 363, 302, 201 भादवि के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है। लगभग 1 वर्ष बाद इस जघन्य अपराध की जांच और खुलासे में थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह, सहायक उपनिरीक्षक आनन्द मसीह तिर्की सहित पुलिस टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
यह मामला न केवल कानून व्यवस्था की दृष्टि से गंभीर है, बल्कि यह समाज में व्याप्त अंधविश्वास की उस खतरनाक सच्चाई को भी उजागर करता है, जिसमें एक बाप ने अपने बीमार बेटे को ठीक करने के भ्रम में एक मासूम की जान ले ली।
पुलिस की तत्परता से एक सनसनीखेज मामला सुलझा, लेकिन यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है आख़िर हम 21वीं सदी में किस दिशा में जा रहे हैं?
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