NCERT Controversy
NCERT Controversy: देश की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए NCERT की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में शामिल एक विवादित अंश पर ‘स्वतः संज्ञान’ (Suo Motu Cognizance) लिया है। इस किताब में न्यायपालिका के भीतर व्याप्त कथित भ्रष्टाचार का जिक्र किया गया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने “गंभीर चिंता” का विषय बताया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी संस्था, विशेषकर न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने या उसे बदनाम करने की अनुमति किसी को भी नहीं दी जाएगी। न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में कड़ी कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
सदन की कार्यवाही के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस विषय को पीठ के समक्ष रखा। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कक्षा 8 के छोटे बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह एक गहरी चिंता का विषय है। सिब्बल के तर्कों का समर्थन करते हुए जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि इस प्रकार का कंटेंट भारतीय संविधान के ‘बेसिक स्ट्रक्चर’ (मूल संरचना) के सिद्धांतों के विरुद्ध प्रतीत होता है। जजों ने माना कि शिक्षा का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास जगाना होना चाहिए, न कि कच्ची उम्र में उनके प्रति अविश्वास पैदा करना।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले पर भावुक और सख्त होते हुए कहा कि उन्होंने संस्थान के प्रमुख के रूप में अपना कर्तव्य निभाया है। उन्होंने संकेत दिया कि यह पाठ्यपुस्तक में किसी गलती से शामिल हुआ अंश नहीं, बल्कि एक “सोचा-समझा कदम” लगता है। CJI ने बार और बेंच को आश्वस्त करते हुए कहा, “सभी उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश इस विषय से परेशान हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखूँगा और कानून अपना काम करेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका की छवि खराब करने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विवाद की जड़ कक्षा 8 की नई सोशल साइंस की NCERT टेक्स्टबुक है। इसमें “न्यायपालिका के सामने चुनौतियां” शीर्षक के तहत भ्रष्टाचार, लंबित मामलों का भारी बोझ (Backlog of cases), और जजों की कमी को सूचीबद्ध किया गया है। किताब के “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” खंड में यह भी बताया गया है कि जज एक ‘कोड ऑफ कंडक्ट’ से बंधे होते हैं, जो अदालत के भीतर और बाहर उनके आचरण को नियंत्रित करता है। हालांकि, पाठ्यक्रम में ‘भ्रष्टाचार’ शब्द का सीधा उपयोग न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था के लिए किए जाने पर शीर्ष अदालत ने आपत्ति जताई है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने के बाद, अब गेंद शिक्षा मंत्रालय और NCERT के पाले में है। न्यायालय यह जांच करेगा कि क्या इस तरह का कंटेंट शैक्षणिक मानकों के अनुरूप है या यह वास्तव में न्यायिक निष्पक्षता पर हमला है। बेंच ने सभी पक्षों को धैर्य रखने की सलाह दी है और कहा है कि वे इस मामले की गहराई तक जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकरण के बाद NCERT को अपने सिलेबस की समीक्षा करनी पड़ सकती है ताकि शिक्षा और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान के बीच एक उचित संतुलन बना रहे।
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