Supriya Shrinate
Supriya Shrinate vs Kangana: केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलकर ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) करने के फैसले ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर भाजपा सांसद कंगना रनौत के एक ताजा बयान ने आग में घी डालने का काम किया है, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें आड़े हाथों लिया है।
मनरेगा, जो दशकों से ग्रामीण भारत की आजीविका का आधार रहा है, अब अपने नए नाम को लेकर चर्चा में है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार जानबूझकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाकर उनकी विरासत को मिटाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस सहित कई क्षेत्रीय दलों का मानना है कि गांधी जी के नाम को हटाना केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक वैचारिक हमला है। वहीं, सरकार का तर्क है कि ‘VB-G RAM G’ (वीबी-ग्राम जी) के जरिए वह ग्रामीण विकास को एक नई और आधुनिक पहचान देना चाहती है।
इस पूरे विवाद के बीच मंडी से भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया। संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए कंगना ने कहा, “मनरेगा का नाम ‘जी राम जी’ करने से गांधी जी का अपमान कैसे हो सकता है? गांधी जी ने तो खुद ‘रघुपति राघव राजा राम’ को लेकर एक नेशनल एंथम (राष्ट्रगान) बनाया था।” उन्होंने आगे तर्क दिया कि गांधी जी के सपनों को पूरा करने के लिए ही सरकार ने ‘राम’ का नाम इस योजना से जोड़ा है। कंगना के इस बयान में भजन को ‘राष्ट्रगान’ बताने पर उनकी काफी आलोचना हो रही है।
कंगना रनौत के इस बयान पर कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड सुप्रिया श्रीनेत ने तीखा तंज कसा है। उन्होंने कंगना का वीडियो साझा करते हुए लिखा, “चलो भाई आज देश को एक नया नेशनल एंथम भी पता चल गया! बीजेपी में एक से एक शिरोमणि भरे पड़े हैं।” सुप्रिया के इस कटाक्ष का उद्देश्य कंगना के सामान्य ज्ञान और भाजपा की बयानबाजी पर सवाल उठाना था। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि कंगना को इतिहास और राष्ट्रीय प्रतीकों की सही जानकारी नहीं है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस बदलाव की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ताउम्र प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त रहे और उनके अंतिम शब्द भी ‘हे राम’ थे। गहलोत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि केंद्र सरकार ‘राम’ नाम की आड़ लेकर गांधी जी के नाम को दरकिनार करने का जो प्रयास कर रही है, वह अत्यंत निंदनीय है। उनके अनुसार, यह गांधी जी के सिद्धांतों और उनके योगदान को छोटा दिखाने की एक सोची-समझी साजिश है।
मनरेगा का नाम बदलना केवल कागजी बदलाव नहीं रह गया है, बल्कि यह एक भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्षी दल इसे गांधी बनाम राम की लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष इसे ‘विकसित भारत’ के संकल्प से जोड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद ग्रामीण मतदाताओं के बीच किस तरह का प्रभाव डालता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
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