Surajpur Congress Protest
Surajpur Congress Protest : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के विश्रामपुर थाना परिसर के सामने राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच जारी खींचतान के चलते अब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने थाने के सामने मोर्चा खोल दिया है। राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सहित कई दिग्गज नेता विश्रामपुर थाने के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। धरने को संबोधित करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने सूरजपुर पुलिस प्रशासन पर तानाशाही और अड़ियल रवैया अपनाने का खुला आरोप लगाया। उन्होंने अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि शाम 6 बजे तक कांग्रेस पार्टी की जायज मांगों पर प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वह वहीं पर भूख हड़ताल शुरू कर देंगे।
इस पूरे बड़े राजनीतिक विवाद की शुरुआत भाजपा के जिलाध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी की एक शिकायत से हुई। उनकी शिकायत के आधार पर विश्रामपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन के खिलाफ कथित तौर पर धमकी देने, गाली-गलौज करने और आर्म्स एक्ट (हथियार कानून) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। इस कार्रवाई के विरोध में पूरी कांग्रेस पार्टी लामबंद हो गई है। हाल के दिनों में पीसीसी चीफ की कुर्सी और संगठन को लेकर चल रही अंदरूनी बयानबाजी के बीच, इस प्रदर्शन के मंच पर दीपक बैज, टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल एक बार फिर कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े दिखाई दिए, जो राज्य की राजनीति में एक बड़ा संकेत है।
धरना प्रदर्शन के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने पुलिसिया कार्रवाई की वैधानिकता पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आर्म्स एक्ट की धाराओं को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा, ‘अगर पुलिस ने हमारे नेता पर आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है, तो प्रशासन को यह बताना चाहिए कि क्या कोई हथियार चलाया गया था? क्या नरेंद्र जैन के पास से कोई अवैध हथियार बरामद किया गया है? क्या पुलिस के पास इसका कोई सबूत है?’ उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी इस संबंध में स्थानीय पुलिस से सवाल पूछ रहे हैं, तो प्रशासन की ओर से केवल यह रटा-रटाया जवाब मिल रहा है कि मामले की जांच चल रही है। सिंहदेव ने कहा कि आगामी चुनाव की प्रक्रिया में कांग्रेस के सक्रिय साथियों को डराने और परेशान करने के लिए ही यह फर्जी एफआईआर दर्ज की गई है।
जब प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के आला अधिकारी मौके पर बातचीत के लिए पहुंचे, तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (पीसीसी चीफ) दीपक बैज ने उन पर सत्ताधारी दल के दबाव में काम करने का तीखा आरोप लगाया। अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए बैज ने कहा, ‘हम भी लंबे समय तक राज्य की सत्ता में रहे हैं और हम एक साधारण थानेदार की ताकत और उसके अधिकारों को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। हम वो लोग हैं जिन्होंने झीरम घाटी के भीषण नक्सली हमले में गोलियां खाई हैं, हम डरने वाले नहीं हैं।’ उन्होंने पुलिस से सीधे जवाब मांगते हुए पूछा कि बिना किसी प्रारंभिक निष्पक्ष जांच के सीधे आर्म्स एक्ट जैसी गैर-जमानती धाराएं कैसे लगा दी गईं?
दीपक बैज ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जैसी दमनकारी धाराओं से भी पीछे हटने वाले नहीं हैं। लेकिन किसी भी नागरिक या राजनेता पर कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना बेहद जरूरी है। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि जब तक पुलिस प्रशासन नरेंद्र जैन के खिलाफ लगाई गई आर्म्स एक्ट की झूठी धाराओं को वापस नहीं ले लेता, तब तक उनका यह धरना प्रदर्शन चौबीसों घंटे इसी तरह जारी रहेगा और आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
सोमवार को कड़ाके की धूप और भीषण गर्मी के बावजूद पूरे दिन कांग्रेस का यह विशाल प्रदर्शन लगातार जारी रहा। इस धरने में एकजुटता दिखाने के लिए कोरबा की सांसद ज्योत्सना महंत, पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत, पूर्व विधायक भानू प्रताप सिंह, पारस नाथ राजवाड़े और अंबिका सिंहदेव समेत कई अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सूरजपुर पहुंचे। दिन ढलने के बाद भी नेताओं का हौसला कम नहीं हुआ। रात होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विश्रामपुर थाने के ठीक सामने सड़क पर चटाई और दरी बिछा दी और वहीं डट गए। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के साथ एआईसीसी सदस्य आदितेश्वर सिंहदेव, अंबिकापुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद और सूरजपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशि सिंह सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पूरी रात जागकर थाने के सामने धरना दिया।
कांग्रेस नेतृत्व ने स्थानीय प्रशासन और विपक्षी दल पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव को सीधे तौर पर प्रभावित करने और मतदाताओं के बीच डर का माहौल बनाने के उद्देश्य से की गई है। पार्टी ने सामूहिक रूप से मुख्य मांग रखी है कि राजनीतिक द्वेष के तहत दर्ज की गई इस एफआईआर को तुरंत निरस्त कर वापस लिया जाए। इसके साथ ही, बिना जांच के इतनी गंभीर धाराएं लगाने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी उच्च स्तरीय दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि कानून की निष्पक्षता बनी रहे।
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