Surajpur Crime
Surajpur Crime: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं और मां-बच्चे के पवित्र रिश्ते को झकझोर कर रख दिया है। एक कलयुगी मां ने अपने ही चार महीने के मासूम बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी। ग्राम जयपुर में घटी इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके में मातम और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। जिस मां को बच्चे का सुरक्षा कवच माना जाता है, वही उसकी काल बन गई। पुलिस की शुरुआती जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों ने इस मामले में रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे किए हैं, जिसके बाद आरोपी महिला को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
घटना वाले दिन 23 वर्षीय आरोपी महिला बृन्दावती अपने चार माह के पुत्र हंसराज को गोद में लेकर घर के बाहर खड़ी थी। बच्चा लगातार रो रहा था, जिसे चुप कराने के बजाय मां को अचानक भीषण गुस्सा आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुस्से में अंधी होकर बृन्दावती ने मासूम को हवा में लहराते हुए पूरी ताकत से जमीन पर पटक दिया। जमीन पथरीली होने के कारण बच्चे के सिर में गंभीर चोटें आईं और वह अचेत हो गया। एक मां का यह हिंसक रूप देखकर आसपास के लोग भी सन्न रह गए। आनन-फानन में घायल हंसराज को जिला चिकित्सालय ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
25 मार्च 2026 को जिला चिकित्सालय से प्राप्त मेमो के आधार पर पुलिस ने मर्ग कायम कर अपनी तफ्तीश शुरू की। मासूम हंसराज की मौत प्राकृतिक नहीं लग रही थी, इसलिए पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के संदेह पर मुहर लगा दी। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि बच्चे की मौत सिर की हड्डी टूटने और अंदरूनी ब्रेन हैमरेज के कारण हुई थी, जो किसी भारी वस्तु से टकराने या जमीन पर जोर से पटकने की स्थिति में ही संभव है। इस वैज्ञानिक साक्ष्य ने आरोपी मां के खिलाफ मामले को और मजबूत कर दिया।
मामले की संवेदनशीलता और क्रूरता को देखते हुए सरगुजा रेंज के डीआईजी एवं एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर ने तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। चौकी सलका उमेश्वरपुर पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाई और गांव के गवाहों के बयान दर्ज किए। साक्ष्यों के आधार पर संदेह की सुई सीधे मां बृन्दावती पर टिकी। पुलिस टीम ने जब उसे हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो वह ज्यादा देर तक झूठ नहीं बोल पाई। अंततः उसने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि बच्चे के लगातार रोने से वह चिड़चिड़ाहट में आ गई थी और उसी आवेश में उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
आरोपी मां के इकबालिया बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। 31 मार्च 2026 को पुलिस ने बृन्दावती को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। इस पूरी कार्रवाई में चौकी प्रभारी संजय सिंह और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या महिला किसी मानसिक तनाव या अवसाद से जूझ रही थी, जिसके कारण उसने अपने ही कलेजे के टुकड़े की जान ले ली।
सूरजपुर की यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि समाज में बढ़ती असहनशीलता और मानसिक विकारों की ओर भी इशारा करती है। एक चार महीने का बच्चा, जो अपनी जरूरतों के लिए केवल रोकर अपनी बात कह सकता है, उसकी आवाज को हमेशा के लिए शांत कर देना किसी भी तर्क से परे है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव के बाद कई महिलाएं ‘पोस्टपार्टम डिप्रेशन’ का शिकार होती हैं, हालांकि यह किसी भी सूरत में हत्या जैसे जघन्य अपराध का औचित्य नहीं हो सकता। फिलहाल आरोपी महिला जेल में है और कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन गांव की गलियों में आज भी उस मासूम की चीखें गूंज रही हैं।
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