Surajpur News
Surajpur News: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहाँ स्कूली छात्रों द्वारा राजनीतिक नेताओं के स्वागत और नारेबाजी को लेकर शिक्षा विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। मामला हसदेव क्षेत्र का है, जहाँ दो दिन पहले कांग्रेस आदिवासी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया का दौरा हुआ था। इस दौरान स्कूली छात्रों ने न केवल उनका स्वागत किया, बल्कि ‘हसदेव बचाओ’ के नारे भी लगाए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आ गया। विभाग ने इसे अनुशासनहीनता और शैक्षणिक संस्थान के नियमों का उल्लंघन माना है।
घटना 20 जनवरी की है, जब डॉ. विक्रांत भूरिया कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशि सिंह और अन्य नेताओं के साथ हसदेव बचाव आंदोलन के समर्थन में सूरजपुर पहुँचे थे। जब उनका काफिला रामानुजनगर ब्लॉक के गणेशपुर गाँव से गुजर रहा था, तब वहाँ के हायर सेकेंडरी और मिडिल स्कूल के छात्रों को सड़क किनारे कतारबद्ध तरीके से खड़ा किया गया था। छात्रों ने कांग्रेस नेताओं का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उनके साथ मिलकर ‘हसदेव बचाओ’ के नारे लगाए। भाजपा के स्थानीय जिलाध्यक्ष मुरली सोनी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे बच्चों का राजनीतिक इस्तेमाल करार दिया, जिससे मामला और गरमा गया।
वीडियो वायरल होने के बाद सूरजपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अजय मिश्रा ने तुरंत संज्ञान लिया और रामानुजनगर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को जांच के निर्देश दिए। जांच प्रतिवेदन में पाया गया कि इस घटना के पीछे स्कूल प्रबंधन की मौन सहमति या लापरवाही थी। जांच में हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल मुरित राम कोसरिया, लेक्चरर राजेश कुमार चौधरी और मिडिल स्कूल के हेडमास्टर समान राम सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई। हालांकि, आरोपी शिक्षकों ने अपने बचाव में तर्क दिया कि यह घटना लंच ब्रेक (मध्यान्ह भोजन अवकाश) के दौरान हुई थी और छात्रों ने स्वेच्छा से स्वागत किया था, लेकिन प्रशासन इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ।
जांच रिपोर्ट के आधार पर सूरजपुर डीईओ ने कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए फाइल संयुक्त संचालक (JD) शिक्षा, सरगुजा संभाग को भेजी। जेडी संजय गुप्ता ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद तत्काल प्रभाव से मिडिल स्कूल के हेडमास्टर समान राम सिंह को निलंबित कर दिया है। वहीं, हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल और लेक्चरर की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है; उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ भी निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
इस कार्रवाई ने जिले के अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक कड़ा संदेश दिया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों का उपयोग किसी भी प्रकार के राजनीतिक एजेंडे या नारेबाजी के लिए नहीं किया जाना चाहिए। छात्रों की सुरक्षा और उनका शैक्षणिक वातावरण सर्वोपरि है। हसदेव बचाने का मुद्दा भले ही सामाजिक और पर्यावरणीय हो, लेकिन स्कूली बच्चों को इस तरह राजनीतिक दौरों में शामिल करना सेवा नियमों के विरुद्ध है। फिलहाल, गणेशपुर स्कूल में इस कार्रवाई के बाद सन्नाटा पसरा है और विभाग मामले की तह तक जाने के लिए आगे की पूछताछ कर रहा है।
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