छत्तीसगढ़

Surajpur school kids: सूरजपुर में मासूमों का छलका दर्द, चोरी का आरोप और टीसी की धमकी पर थाने पहुंचे बच्चे

Surajpur school kids: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने शिक्षा के मंदिर की पवित्रता और पुलिस की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व माध्यमिक शाला कंरजवार के नन्हे-मुन्ने बच्चे न्याय की गुहार लगाते हुए, सिसकते हुए प्रतापपुर थाने की दहलीज पर जा पहुंचे। बच्चों का आरोप है कि उनके स्कूल के प्रिंसिपल उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं और उन पर झूठे चोरी के आरोप मढ़ रहे हैं। थाने में अपनी व्यथा सुनाते इन मासूमों का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई हतप्रभ है।

गणतंत्र दिवस की तैयारी और स्पीकर का गायब होना: विवाद की जड़

मामले की शुरुआत आगामी 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम की तैयारियों से हुई। बच्चे देशभक्ति गीतों पर डांस की प्रैक्टिस करने के लिए स्कूल में एक छोटे से स्पीकर बॉक्स का उपयोग करते थे। करीब तीन दिन पहले वह स्पीकर अचानक स्कूल से गायब हो गया। इस घटना के बाद स्कूल के प्रिंसिपल राजेश प्रसाद यादव ने बिना किसी पुख्ता सबूत के बच्चों पर ही चोरी का संदेह व्यक्त किया और उन्हें अपराधी की तरह प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

मानसिक प्रताड़ना और भविष्य बर्बाद करने की धमकी: डरे हुए हैं छात्र

बच्चों ने पुलिस को रोते हुए बताया कि पिछले तीन दिनों से प्रिंसिपल उन पर चोरी कबूल करने का भारी दबाव बना रहे थे। हद तो तब हो गई जब उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने चोरी की बात नहीं मानी, तो उनका ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) काट दिया जाएगा। प्रिंसिपल ने कथित तौर पर यह भी कहा कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि उन बच्चों का दाखिला क्षेत्र के किसी भी दूसरे स्कूल में न हो सके। टीसी कटने और भविष्य खराब होने के डर से मासूम बच्चे बुरी तरह सहम गए और मानसिक तनाव का शिकार हो गए।

अपनों का भी नहीं मिला साथ: मजबूरी में पुलिस के पास पहुंचे मासूम

जब इस विवाद की भनक बच्चों के परिजनों को लगी, तो उन्होंने स्थिति को समझने के बजाय बच्चों को ही डांटना शुरू कर दिया। स्कूल में गुरु का डर और घर पर माता-पिता की फटकार ने बच्चों को मानसिक रूप से तोड़ दिया। कहीं भी सुनवाई न होते देख, न्याय की अंतिम उम्मीद में ये बच्चे अकेले ही पैदल चलकर थाने पहुंच गए। वहां मौजूद लोगों ने जब बच्चों को अपनी आपबीती सुनाते देखा, तो उनकी आंखों में भी आंसू आ गए।

पुलिस की भूमिका पर सवाल: कार्रवाई के बजाय कराया समझौता

इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली सबसे अधिक विवादों में है। आरोप है कि पुलिस ने बच्चों की मानसिक स्थिति और उन पर लगे संगीन आरोपों की जांच करने के बजाय इसे सामान्य विवाद माना। पुलिस ने प्रिंसिपल को थाने बुलाकर दोनों पक्षों के बीच ‘समझौता’ करा दिया और मामले को रफा-दफा कर दिया। बिना किसी ठोस कार्रवाई या भविष्य की सुरक्षा के बच्चों को वापस भेज दिया गया। अब स्थानीय लोग और शिक्षाविद मांग कर रहे हैं कि बच्चों को प्रताड़ित करने वाले ऐसे शिक्षकों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।

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