Surajpur Crime
Surajpur Crime: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में पिछले एक साल से सक्रिय उत्तर प्रदेश के लकड़ी माफियाओं के दुस्साहस का एक बड़ा मामला सामने आया है। सूरजपुर जिले में प्रशासनिक अधिकारियों ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो सीधे एसडीएम (SDM) के फर्जी हस्ताक्षर और सील का उपयोग कर अवैध लकड़ी की तस्करी कर रहा था। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सूरजपुर की एसडीएम शिवानी जायसवाल के कड़े रुख के बाद पुलिस ने मुख्य सरगना आजम खान सहित तीन लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब रामानुजनगर क्षेत्र में एक ट्रक की नियमित जांच की गई। इस ट्रक में लगभग 15 टन यूकेलिप्टस (नीलगिरी) की लकड़ी लदी हुई थी, जिसे रायपुर के खरोरा स्थित एक प्लाईवुड फैक्ट्री ले जाया जा रहा था। जब अधिकारियों ने पेड़ कटाई और परिवहन से संबंधित दस्तावेज मांगे, तो चालक ने सूरजपुर एसडीएम शिवानी जायसवाल के हस्ताक्षर और सील वाला ‘अनुज्ञा प्रमाण पत्र’ दिखाया। प्रथम दृष्टया दस्तावेज संदिग्ध लगने पर जब इसकी बारीकी से जांच की गई, तो पता चला कि वह प्रमाण पत्र पूरी तरह कूट रचित और फर्जी था। माफिया ने स्वयं ही एसडीएम की फर्जी सील तैयार कर ली थी।
दस्तावेजों में हेराफेरी और फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद एसडीएम शिवानी जायसवाल ने तत्काल पुलिस को अपराध दर्ज करने का निर्देश दिया। उनके कार्यालय के लिपिक की शिकायत पर पुलिस ने लकड़ी माफिया आजम खान, बृजनारायण साहू और राजेश यादव के विरुद्ध धोखाधड़ी और कूट रचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक ऐसे कितने फर्जी दस्तावेजों के जरिए जंगलों का कटान किया है।
सरगुजा संभाग में लकड़ी माफिया के हौसले इतने बुलंद होने के पीछे ‘राजनीतिक संरक्षण’ को मुख्य कारण माना जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि इस संगठित गिरोह की पहुंच सत्ता के गलियारों तक है। यही वजह है कि वन विभाग और पुलिस के बड़े अधिकारी इस मामले में हाथ डालने से बचते रहे हैं। आरोप है कि जब भी कोई ईमानदार अधिकारी इन पर कार्रवाई की कोशिश करता है, तो बड़े नेताओं के फोन आने लगते हैं और जांच को बीच में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। बताया जा रहा है कि इस अवैध कारोबार की काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा रसूखदार नेताओं तक पहुंचता है।
माफियाओं का काम करने का तरीका बेहद शातिर है। वे कागजों पर नीलगिरी या यूकेलिप्टस की कटाई दिखाते हैं, लेकिन इसकी आड़ में जंगलों से बेशकीमती इमारती लकड़ियों की तस्करी की जा रही है। गांव के भोले-भाले किसानों से ओने-पौने दाम पर पेड़ खरीदकर उन्हें अवैध डिपो में डंप किया जाता है और फिर फर्जी कागजों के सहारे इन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की फैक्ट्रियों में खपाया जाता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें माफिया के गुर्गों द्वारा जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं।
पिछले एक साल में सैकड़ों ट्रक लकड़ी की तस्करी की जा चुकी है, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से स्थानीय लोगों का मनोबल गिर चुका है। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक ढिलाई के कारण लोग अब शिकायत करने से भी डरने लगे हैं। सूरजपुर का यह ताजा मामला प्रशासनिक सतर्कता का उदाहरण तो है, लेकिन सवाल यह बना हुआ है कि क्या पुलिस इस गिरोह के पीछे छिपे असली ‘सफेदपोश’ चेहरों तक पहुंच पाएगी या मामला केवल छोटे प्यादों तक सीमित रह जाएगा।
Read More : Hawaii Disaster: ओआहू में ‘कोना’ तूफान का तांडव, 20 साल की सबसे भीषण बाढ़; 5500 लोगों को घर छोड़ने का आदेश!
Bilaspur Bird Flu Alert: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है,…
AIADMK Election Manifesto: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़…
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 के सातवें दिन को 'महासप्तमी' के रूप में अत्यंत…
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर सातवां दिन मां दुर्गा के…
Ambikapur Airport: छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल के निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई…
Love Affair Case: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने…
This website uses cookies.