Surguja ACB Action
Surguja ACB Action: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरगुजा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने दरिमा तहसील में पदस्थ एक लिपिक (क्लर्क) को 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस मामले की सबसे विचित्र बात यह है कि आरोपी ने रिश्वत की मांग ही ‘एसीबी की रेड’ से बचाने के नाम पर की थी। आरोपी लिपिक ने शिक्षा विभाग के एक कर्मचारी को डराया था कि उसके खिलाफ भ्रष्टाचार की कार्रवाई होने वाली है और इसे रुकवाने के लिए सेटिंग के नाम पर रुपयों का सौदा किया।
घटनाक्रम की शुरुआत 10 मार्च को हुई, जब दरिमा तहसील के लिपिक अनिल गुप्ता ने डीईओ (DEO) कार्यालय में कार्यरत लिपिक अखिलेश सोनी को फोन कर कलेक्टोरेट चौक के पास मिलने बुलाया। मुलाकात के दौरान अनिल गुप्ता ने एक बड़ा झूठ बोला कि उसका सगा भतीजा एसीबी कार्यालय में ऊंचे पद पर तैनात है। उसने अखिलेश को डराया कि विभाग में उसकी शिकायत हुई है और बहुत जल्द एसीबी की टीम उस पर ट्रैप या रेड की कार्रवाई करने वाली है। इस काल्पनिक डर से घबराकर जब अखिलेश ने मदद मांगी, तो अनिल ने मामले को रफा-दफा करने के लिए 2 लाख रुपए की मांग रख दी।
अखिलेश सोनी के मुताबिक, पहली बातचीत के बाद अनिल गुप्ता लगातार उन पर पैसों के लिए दबाव बनाने लगा। आरोपी ने कई बार फोन किए और हद तो तब हो गई जब वह खुद डीईओ ऑफिस पहुंचकर पैसे की व्यवस्था करने की धमकी देने लगा। मानसिक दबाव और लगातार हो रही मांग के बाद दोनों के बीच मामला 1 लाख रुपए में तय हुआ। हालांकि, अखिलेश सोनी ने इस भ्रष्टाचार के आगे झुकने के बजाय हिम्मत दिखाई और पूरे मामले की लिखित शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो के मुख्यालय में कर दी।
शिकायत की पुष्टि होने के बाद एसीबी के डीएसपी प्रमोद खेस के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। शुक्रवार देर शाम योजना के मुताबिक, अखिलेश सोनी पैसे देने के लिए कलेक्टोरेट चौक स्थित लाइब्रेरी के पास पहुंचे। जैसे ही अनिल गुप्ता वहां पहुंचा और उसने 1 लाख रुपए की नगद राशि हाथ में ली, उसने फौरन उसे अपनी गाड़ी की डिक्की में छिपा दिया। ठीक इसी पल, आसपास सादे लिबास में तैनात एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया। गाड़ी की डिक्की की तलाशी लेने पर रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई।
एसीबी ने आरोपी अनिल गुप्ता को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच में पता चला है कि अनिल गुप्ता पहले अंबिकापुर के नजूल तहसीलदार कार्यालय में पदस्थ था और दो साल पहले ही उसका तबादला दरिमा तहसील में हुआ था। एसीबी की टीम अब इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि क्या सच में उसका कोई रिश्तेदार विभाग में है या उसने केवल ठगी के उद्देश्य से यह झूठी कहानी गढ़ी थी।
इस सफल ट्रैप ने सरकारी महकमों में हड़कंप मचा दिया है। एसीबी के अधिकारियों का कहना है कि यह मामला दर्शाता है कि कैसे कुछ भ्रष्ट कर्मचारी विभाग के नाम का दुरुपयोग कर अपने ही साथियों को ठगने का प्रयास करते हैं। डीएसपी प्रमोद खेस ने जनता और सरकारी कर्मचारियों से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति काम के बदले या किसी कार्रवाई के नाम पर पैसों की मांग करता है, तो बिना डरे इसकी सूचना तत्काल भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को दें।
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