Surguja Communal Tension
Surguja Communal Tension : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डूमरडीह में वाहनों की एक सामान्य टक्कर ने देखते ही देखते सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया। घटना की शुरुआत 2 अप्रैल को हुई, जब रोहितेश्वर प्रताप सिंह अपनी कार से ककनी स्थित फार्म हाउस जा रहे थे। रास्ते में डूमरडीह नाले के पास उनकी कार की टक्कर कादिर खान के ऑटो से हो गई। यह एक मामूली सड़क दुर्घटना थी, लेकिन इसके बाद उपजे विवाद ने पूरे क्षेत्र की शांति भंग कर दी। कादिर खान ने पहले फार्म हाउस जाकर गाली-गलौज की और बाद में अपने साथियों के साथ मिलकर इस विवाद को हिंसक मोड़ दे दिया।
विवाद तब और गहरा गया जब रोहितेश्वर डूमरडीह हाईस्कूल के पास पहुंचे और कादिर खान ने उनका रास्ता रोक लिया। वहां से बचकर जब रोहितेश्वर वापस अपने फार्म हाउस लौटे, तो कुछ ही देर बाद कादिर खान अपने साथी मोहम्मद खान, हयात खान, अल्ताफ खान और फरहान खान के साथ वहां आ धमका। आरोपियों ने न केवल रोहितेश्वर के साथ मारपीट की, बल्कि उनकी कार को भी पत्थरों और डंडों से बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। आरोप है कि हमले के दौरान आरोपियों ने उकसाने वाले धार्मिक नारे भी लगाए, जिससे क्षेत्र का माहौल गरमा गया।
पीड़ित पक्ष की शिकायत पर धौरपुर पुलिस ने 4 अप्रैल को मामला दर्ज किया। रविवार की सुबह पुलिस ने डूमरडीह में घेराबंदी कर मुख्य आरोपी कादिर खान सहित पांचों नामजद हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं, जिनमें मारपीट और शांति भंग करना शामिल है, के तहत कार्रवाई की गई। आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई का उद्देश्य स्थिति को और बिगड़ने से रोकना था।
आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद रविवार दोपहर को स्थिति अनियंत्रित हो गई। आक्रोशित हिंदू समाज के युवकों ने डूमरडीह में एक बड़ी विरोध रैली निकाली। इस दौरान भीड़ का गुस्सा फूट पड़ा और प्रदर्शनकारियों ने मुस्लिम समुदाय के एक व्यक्ति की ऑटो और गुमटी को आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं, सड़क पर खड़ी एक बस में भी तोड़फोड़ की गई। इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई, जिससे गांव में दहशत का माहौल बन गया। आगजनी और तोड़फोड़ की इन घटनाओं ने प्रशासनिक अमले की चुनौतियों को और बढ़ा दिया।
आगजनी की घटना के बाद मुस्लिम समुदाय ने भी थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने दंगा भड़काने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में केस दर्ज किया है। इस मामले में भी चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सरगुजा एसपी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। एहतियात के तौर पर अंबिकापुर पुलिस लाइन से अतिरिक्त बल बुलाकर डूमरडीह को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। फिलहाल, उच्च अधिकारियों की निगरानी में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है।
वर्तमान में डूमरडीह की गलियों में सन्नाटा है और भारी पुलिस बल गश्त कर रहा है। प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। यह घटना दर्शाती है कि किस तरह एक छोटी सी आपसी टक्कर, संवाद की कमी और उग्र भावनाओं के कारण बड़े सांप्रदायिक तनाव में बदल सकती है। पुलिस अब दोनों पक्षों के बीच सुलह और स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयास में जुटी है।
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