Surguja Fuel Crisis :
Surguja Fuel Crisis : छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में पिछले कुछ दिनों से ईंधन की किल्लत ने विकराल रूप ले लिया है। पेट्रोल और डीजल की भारी कमी के कारण जिले के अधिकांश पेट्रोल पंप पूरी तरह से “ड्राई” यानी खाली हो चुके हैं। जिन इक्का-दुक्का पंपों पर स्टॉक बचा है, वहां सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि आम जनता से लेकर व्यापारिक वर्ग तक में हड़कंप मचा हुआ है। इस संकट को देखते हुए सरगुजा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है और जिला दंडाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इस आपातकालीन स्थिति में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। डीलर्स का कहना है कि आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे पूरा संभाग ठप होने की कगार पर है।
सरगुजा संभाग अपनी कोयला खदानों के लिए जाना जाता है, जहाँ से हर दिन हजारों ट्रकों के माध्यम से कोयला विभिन्न राज्यों के पावर प्लांट्स तक भेजा जाता है। डीजल की भारी कमी के कारण इन ट्रकों के पहिये थमने लगे हैं। यदि ट्रकों का संचालन इसी तरह बाधित रहा, तो कोयले की लोडिंग और सप्लाई चेन टूट जाएगी। इसका सीधा असर देश के बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है, क्योंकि कई थर्मल पावर स्टेशन कोयले की कमी के कारण पहले से ही दबाव में हैं। स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि डीजल न मिलने से वे अनुबंधों को पूरा करने में असमर्थ हैं, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
ईंधन संकट की सबसे मारक चोट ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों पर पड़ी है। वर्तमान सीजन में सिंचाई और खेती-किसानी के लिए डीजल की निरंतर आवश्यकता होती है। ट्रैक्टरों और सिंचाई पंपों के लिए डीजल न मिल पाने के कारण किसानों के खेत प्यासे रह जा रहे हैं। सरगुजा के कृषि प्रधान क्षेत्रों में किसान ड्रम और कैन लेकर पेट्रोल पंपों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि अगर दो-चार दिन और यही स्थिति रही, तो उनकी खड़ी फसलें बर्बाद हो जाएंगी, जिससे उन्हें भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ेगा।
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने इस कृत्रिम संकट के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को जिम्मेदार ठहराया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी कंपनियां संभाग की मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कर रही हैं। डिपो से टैंकर्स की लोडिंग में अत्यधिक देरी और कोटा कम किए जाने की बात भी सामने आ रही है। डीलर्स का तर्क है कि वे मांग पत्र (इंडेंट) भेजने और अग्रिम भुगतान करने के बावजूद ईंधन प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन्हें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
संकट के समाधान के लिए डीलर्स एसोसिएशन ने जिला प्रशासन से विशेष “कमांड एंड कंट्रोल” की मांग की है। उन्होंने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे तेल कंपनियों के उच्च अधिकारियों से बात करें और सरगुजा के लिए ईंधन का विशेष कोटा आवंटित कराएं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ढह जाएगी और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल आ सकता है। फिलहाल, कलेक्टर और खाद्य विभाग के अधिकारी स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस सुधार नजर नहीं आया है। पूरा संभाग प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है।
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