Surguja Jal Jeevan Mission : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से प्रशासन को हिला देने वाली एक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ के तहत काम करने वाले एक स्थानीय ठेकेदार ने विभाग के अधिकारियों पर गंभीर प्रताड़ना और कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं। ठेकेदार का दावा है कि काम पूरी तरह संपन्न होने और जनता को सुविधा मिलने के बावजूद विभाग उनका भुगतान रोक कर बैठा है। अपनी मेहनत की कमाई न मिलने और कर्ज के बोझ से दबने के कारण परेशान ठेकेदार ने अब प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में हड़कंप मच गया है।
पीएचई विभाग के पंजीकृत ठेकेदार रजनीकांत अग्रवाल ने शुक्रवार को सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में उन्होंने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि उन्होंने अंबिकापुर सब-डिवीजन के अंतर्गत जल जीवन मिशन के विभिन्न निर्माण कार्यों को एक साल पहले ही सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था। ठेकेदार के अनुसार, कुल 65 लाख रुपये के प्रोजेक्ट में से उन्हें अब तक केवल 22 लाख रुपये का ही भुगतान किया गया है। शेष राशि के लिए वे महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आरोप है कि पीएचई के सब-इंजीनियर धर्मेंद्र सिंह बिल पास करने के बदले मोटे कमीशन की मांग कर रहे हैं और पैसा न देने पर भुगतान रोकने की धमकी दे रहे हैं।
अपनी शिकायत में रजनीकांत अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि विभागीय अधिकारियों के अड़ियल रवैये और भ्रष्टाचार के कारण उनका मानसिक और आर्थिक संतुलन बिगड़ चुका है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 30 मार्च 2026 को दोपहर 1:00 बजे तक उनका बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो वे पीएचई कार्यालय के सामने खुद को आग लगाकर आत्मदाह कर लेंगे। ठेकेदार का कहना है कि उन्होंने मजदूरों और सामग्री प्रदाताओं का भुगतान करने के लिए बाजार से भारी ब्याज पर कर्ज लिया है, जिसे चुका पाने में वे अब असमर्थ हैं। यह मामला अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
ठेकेदार ने लखनपुर विकासखंड के जुड़वानी गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां जल जीवन मिशन के तहत पानी टंकी का निर्माण, पाइपलाइन विस्तार और हर घर नल कनेक्शन का काम 6 महीने पहले ही चालू हो चुका है। वर्तमान में उस टंकी से सुचारू रूप से जलापूर्ति भी की जा रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि काम की गुणवत्ता और पूर्णता में कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद तकनीकी अधिकारियों द्वारा अंतिम बिल (Final Bill) नहीं बनाना और सत्यापन में देरी करना केवल कमीशन वसूलने की एक रणनीति है। ठेकेदार ने आरोप लगाया कि अधिकारी विकास कार्यों को अपनी कमाई का जरिया बना रहे हैं।
मामले की गंभीरता और आत्मदाह की चेतावनी को देखते हुए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने तत्काल कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) को इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने संबंधित सब-इंजीनियर और अन्य अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने का आदेश भी दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार या भुगतान में जानबूझकर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन अब 30 मार्च से पहले इस विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
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