Surguja Police
Surguja Police : छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम ने राज्य की सुरक्षा और सामाजिक चुनौतियों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरदर्शी बयान दिया है। अंबिकापुर प्रवास के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में बढ़ती नशीले पदार्थों की खपत और नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए पुलिस अपनी रणनीति बदल रही है। डीजीपी ने जोर देकर कहा कि ड्रग्स और गांजे जैसी बुराइयों के खिलाफ केवल पुलिसिया कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे समाज को एक प्रहरी की भूमिका निभानी होगी।
अंबिकापुर में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के उपरांत पत्रकारों से चर्चा करते हुए डीजीपी गौतम ने मादक पदार्थों की तस्करी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पुलिस का प्राथमिक दायित्व गांजा, अफीम और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स की सप्लाई चेन को ध्वस्त करना है, और विभाग इसमें पूरी ताकत झोंक रहा है। हालांकि, उन्होंने एक कड़वी सच्चाई साझा करते हुए कहा कि जब तक समाज के भीतर इन पदार्थों की ‘डिमांड’ कम नहीं होगी, तब तक सप्लाई रोकना एक अंतहीन संघर्ष बना रहेगा। राज्य में गांजे की बढ़ती खपत को उन्होंने एक ‘खतरनाक संकेत’ बताते हुए जनता से अपील की कि वे नशे के खिलाफ जागरूकता अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लें।
डीजीपी ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के अतीत और वर्तमान का विश्लेषण करते हुए एक महत्वपूर्ण खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पूर्व में नक्सली अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर गांजे की खेती करवाते थे और तस्करी से लेवी वसूलते थे। पुलिस की निरंतर कार्रवाई और रणनीतिक दबाव के कारण अब इस अवैध खेती पर काफी हद तक लगाम लगा दी गई है। नक्सलियों के आर्थिक तंत्र को चोट पहुंचाने के लिए पुलिस अब उनके सप्लाई रूटों की सघन निगरानी कर रही है। मादक पदार्थों के व्यापार पर नियंत्रण पाना सीधे तौर पर नक्सली फंडिंग को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
नक्सल मोर्चे पर एक उत्साहजनक दावा करते हुए डीजीपी अरुण देव गौतम ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सीमाओं के भीतर अब नक्सलियों के बड़े और संगठित हथियारबंद दस्ते सक्रिय नहीं रह गए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और विकास कार्यों के कारण नक्सली अब बैकफुट पर हैं। वर्तमान में कुछ ही गिने-चुने कैडर बचे हैं, जो अपनी जान बचाने के लिए सुदूर गांवों में छिपकर शरण ले रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से संकेत देती है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अपने खात्मे की ओर है और सुरक्षा बल अब निर्णायक बढ़त बना चुके हैं।
अंबिकापुर में आयोजित समीक्षा बैठक में सरगुजा रेंज के आईजी और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ डीजीपी ने विस्तृत चर्चा की। सरगुजा संभाग की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने ‘पारंपरिक और व्यवहारिक पुलिसिंग’ अपनाने के निर्देश दिए। चूंकि संभाग का अधिकांश हिस्सा ग्रामीण और दूरस्थ है, इसलिए पुलिस और जनता के बीच की दूरी कम करना प्राथमिकता है। उन्होंने डीएसपी और एसडीओपी स्तर के अधिकारियों को सीधे तौर पर अपने क्षेत्रों की जमीनी हकीकत जानने और थाना स्तर की कार्यप्रणाली में गुणात्मक सुधार लाने की हिदायत दी।
बैठक के समापन पर डीजीपी ने पुलिसिंग के मानकों को ऊंचा उठाने के लिए स्पष्ट रोडमैप दिया। उन्होंने रेंज आईजी को निर्देशित किया कि वे एसडीओपी (SDOP) के कार्यों की नियमित और गहन समीक्षा करें। साथ ही, पुलिस अधीक्षकों को ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ को बढ़ावा देने के लिए कहा गया है, ताकि पुलिस की छवि एक सहायक और मित्र के रूप में स्थापित हो सके। अपराध नियंत्रण के साथ-साथ शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए तकनीकी सर्विलांस और मानवीय खुफिया तंत्र (Human Intelligence) के समन्वय पर विशेष जोर दिया गया है।
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