Suryakumar Yadav
Suryakumar Yadav Form 2025: भारतीय क्रिकेट टीम ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांचवें और अंतिम टी20 मुकाबले में 30 रनों की शानदार जीत दर्ज कर सीरीज को 3-1 से अपने नाम कर लिया है। इस ऐतिहासिक जीत में तिलक वर्मा की आक्रामकता, हार्दिक पांड्या का अनुभव और वरुण चक्रवर्ती की जादुई स्पिन का अहम योगदान रहा। वरुण चक्रवर्ती को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया। लेकिन इस जीत के जश्न के बीच भारतीय खेमे के लिए एक बड़ी चिंता का विषय कप्तान सूर्यकुमार यादव की बल्लेबाजी फॉर्म रही। टी20 के नंबर-1 बल्लेबाज माने जाने वाले सूर्या इस पूरी सीरीज में अपने नाम के अनुरूप प्रदर्शन करने में पूरी तरह नाकाम रहे।
सीरीज के निर्णायक मुकाबले में जब प्रशंसकों को उम्मीद थी कि कप्तान मोर्चे से टीम का नेतृत्व करेंगे, तब सूर्या चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए और मात्र 7 गेंदों में 5 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उनके इस खराब अंत ने पूरी सीरीज में उनके संघर्ष की कहानी बयां कर दी। इस दौरे के चार मैचों में सूर्या के बल्ले से कुल मिलाकर केवल 34 रन निकले। पूरी सीरीज में उनका उच्चतम स्कोर मात्र 12 रन रहा, जो उनके कद के खिलाड़ी के लिए बेहद निराशाजनक है। ऐसा लग रहा है कि विपक्षी गेंदबाजों ने उनकी कमजोरी को भांप लिया है और वे क्रीज पर टिकने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि सूर्यकुमार यादव की फॉर्म में यह गिरावट केवल इस सीरीज तक सीमित नहीं है। साल 2025 उनके करियर का अब तक का सबसे खराब साल साबित हुआ है। आंकड़े गवाह हैं कि इस पूरे कैलेंडर वर्ष में सूर्या टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक भी अर्धशतक नहीं लगा पाए हैं। साल 2025 में उन्होंने कुल 21 मुकाबले खेले और केवल 218 रन बनाए। इस दौरान उनका औसत किसी साधारण बल्लेबाज से भी कम रहा। हालांकि, सूर्या अक्सर मीडिया के सामने यह कहते रहे हैं कि वे नेट्स में अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं और जल्द ही बड़े स्कोर बनाएंगे, लेकिन मैदान पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है।
सीरीज जीतने के बाद जब पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन में सूर्यकुमार यादव से उनकी फॉर्म के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मजाकिया लेकिन ईमानदार लहजे में अपनी स्थिति को स्वीकार किया। सूर्या ने हंसते हुए कहा, “पूरी सीरीज में हमने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन शायद एक चीज जो हम नहीं कर पाए, वह थी सूर्या को एक बल्लेबाज के रूप में ढूंढना। मुझे लगता है कि वह कहीं खो गया था।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे एक मजबूत वापसी करेंगे। कप्तान के तौर पर उन्होंने संतोष जताया कि उनकी खराब फॉर्म के बावजूद टीम के अन्य खिलाड़ियों ने जिम्मेदारी उठाई और मुश्किल परिस्थितियों से टीम को निकाला।
क्रिकेट गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कप्तानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी का असर सूर्या की बल्लेबाजी पर पड़ रहा है। मिडिल ऑर्डर में जिस तरह से वे आउट हो रहे हैं, उससे मिडिल ऑर्डर पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, तिलक वर्मा जैसे युवाओं के उदय ने फिलहाल इस कमी को ढक दिया है, लेकिन विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंटों से पहले कप्तान का फॉर्म में होना अनिवार्य है। टीम प्रबंधन के लिए यह एक पहेली बन गई है कि कैसे ‘मिस्टर 360 डिग्री’ को फिर से पुराने अंदाज में वापस लाया जाए।
भले ही सूर्या के लिए यह साल व्यक्तिगत तौर पर निराशाजनक रहा हो, लेकिन एक लीडर के रूप में उन्होंने सीरीज जीतकर अपनी योग्यता साबित की है। अब भारतीय टीम का अगला लक्ष्य आने वाली घरेलू सीरीज और बड़े टूर्नामेंट हैं। प्रशंसकों को उम्मीद है कि दक्षिण अफ्रीका से लौटते ही सूर्या अपनी पुरानी लय हासिल कर लेंगे और एक बार फिर मैदान के हर कोने में शॉट लगाते नजर आएंगे। फिलहाल, टीम इंडिया की यह 3-1 की जीत उनके बढ़ते मनोबल का प्रतीक है।
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