Suvendu Adhikari
Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग (Election Commission – EC) को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि SIR का दूसरा और महत्वपूर्ण चरण केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की कड़ी निगरानी में आयोजित किया जाए। अधिकारी का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची को त्रुटिहीन (Accurate) और किसी भी प्रकार के हेरफेर (Manipulation) से मुक्त बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनकी इस मांग ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में SIR को लेकर चल रहे घमासान को और हवा दे दी है।
सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग को लिखे अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का दूसरा चरण, जो मतदाता सूची के पूरे प्रोसेस का सबसे जरूरी स्टेज है, पूरी तरह से माइक्रो ऑब्ज़र्वर की निगरानी में होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया है कि इस चरण की तटस्थता (Neutrality) और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए, ये माइक्रो ऑब्ज़र्वर अनिवार्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारी होने चाहिए। उनका यह आग्रह राज्य सरकार के कर्मचारियों पर संभावित हस्तक्षेप और पक्षपात के संदेह को दर्शाता है। अधिकारी ने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि यह चरण ही यह तय करेगा कि अंतिम मतदाता सूची निष्पक्ष, सटीक और हेरफेर से मुक्त है या नहीं।
मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में अधिकतम पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सुवेंदु अधिकारी ने एक और बड़ी मांग रखी है। उन्होंने कहा है कि SIR के स्क्रूटनी फेज (जांच चरण) और सुनवाई (Hearing) की पूरी प्रक्रिया को 100% सीसीटीवी (CCTV) कवरेज के तहत लाया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की है कि प्रक्रिया की सत्यनिष्ठा की पुष्टि के लिए SIR समाप्त होने तक सभी फुटेज को सुरक्षित संभालकर रखा जाए। अधिकारी का कहना है कि यह कदम किसी भी तरह के हेरफेर को रोकने और प्रोसेस की पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि इस चरण पर किया गया कोई भी समझौता (Compromise) अंतिम मतदाता सूची की अखंडता (Integrity) को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकता है।
यह ध्यान देने योग्य है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया केवल पश्चिम बंगाल तक ही सीमित नहीं है। यह प्रक्रिया वर्तमान में पश्चिम बंगाल सहित देश के नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही है। इन सभी क्षेत्रों में मतदाता सूची को अद्यतन (Update) करने और त्रुटियों को दूर करने का कार्य किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत फॉर्म भरने की प्रक्रिया 14 फरवरी तक चलेगी, जिसके बाद दावे, आपत्तियाँ (Objection) दर्ज करने और उनसे संबंधित दस्तावेजों की स्क्रूटनी (जांच) और फिर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारी ने दूसरे चरण के दौरान दावों, आपत्तियों और दस्तावेज़ों से जुड़ी कार्रवाई में सख्त निगरानी की मांग की है।
पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर राजनीतिक घमासान ज़ोरों पर है। राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस पुनरीक्षण प्रक्रिया का विरोध कर रही है, जबकि बीजेपी इस प्रक्रिया को मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है। बीजेपी का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए राज्य में रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों के नामों को मतदाता सूची से हटाकर उन्हें बाहर खदेड़ा जाएगा, जिससे राज्य की जनसांख्यिकी और चुनावी अखंडता (Electoral Integrity) सुनिश्चित होगी। सुवेंदु अधिकारी ने अपने पत्र में न्यूट्रैलिटी, ट्रांसपेरेंसी और सख्त मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग से तुरंत हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें इस महत्वपूर्ण चरण में दखल देने के लिए “गलत असर डालने की सीरियस और लगातार रिपोर्ट” मिल रही हैं।
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