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Online Food Delivery Hike: स्विगी और जोमैटो ने फिर दिया झटका! प्लेटफॉर्म फीस में 17% की भारी बढ़ोतरी

Online Food Delivery Hike:  अगर आप भी उन लोगों में शुमार हैं जो अपनी भूख मिटाने के लिए अक्सर ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स का सहारा लेते हैं, तो अब आपको अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी होगी। प्रमुख फूड डिलीवरी दिग्गज स्विगी (Swiggy) ने अपने ग्राहकों को तगड़ा झटका देते हुए प्लेटफॉर्म फीस में उल्लेखनीय वृद्धि कर दी है। कंपनी ने प्रति ऑर्डर ली जाने वाली फीस को 14.99 रुपये से बढ़ाकर अब 17.58 रुपये कर दिया है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो यह लगभग 17% से अधिक का इजाफा है। यह बदलाव उन करोड़ों यूजर्स को प्रभावित करेगा जो घर बैठे खाना ऑर्डर करने की सुविधा का लाभ उठाते हैं।

जोमैटो भी पीछे नहीं: डिलीवरी मार्केट में बढ़ी प्रतिस्पर्धा और कीमतें

स्विगी अकेला ऐसा प्लेटफॉर्म नहीं है जिसने कीमतों में इजाफा किया है। हाल ही में इसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी जोमैटो (Zomato) ने भी अपनी प्लेटफॉर्म फीस में लगभग 2.40 रुपये की बढ़ोतरी की थी। दिलचस्प बात यह है कि इन कंपनियों ने इस चार्ज की शुरुआत महज 2 रुपये से की थी, जो अब बढ़ते-बढ़ते 17 रुपये के पार जा पहुंची है। दोनों ही प्रमुख कंपनियों के इस कदम के बाद अब ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना एक महंगा सौदा साबित होने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अपनी लाभप्रदता (Profitability) बढ़ाने के लिए धीरे-धीरे इन शुल्कों में वृद्धि कर रही हैं।

ईरान-इजरायल युद्ध का असर: क्यों बढ़ानी पड़ी कंपनियों को अपनी फीस?

स्विगी ने इस मूल्य वृद्धि के पीछे परिचालन और रखरखाव (Operation and Maintenance) से जुड़ी बढ़ती लागतों को मुख्य कारण बताया है। वैश्विक स्तर पर, विशेष रूप से मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। ईंधन की कीमतें बढ़ने का सीधा असर लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी चेन पर पड़ता है। डिलीवरी पार्टनर्स के पेट्रोल खर्च से लेकर रेस्तरां की इनपुट कॉस्ट तक, सब कुछ महंगा हो गया है। इसी अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए कंपनियों ने प्लेटफॉर्म चार्ज बढ़ाने का कठिन निर्णय लिया है।

नियमित यूजर्स पर वित्तीय दबाव: छात्रों और युवाओं की बढ़ेगी परेशानी

प्लेटफॉर्म फीस में इस छोटी सी दिखने वाली बढ़ोतरी का संचयी प्रभाव (Cumulative Impact) काफी बड़ा है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा उन छात्रों और कामकाजी युवाओं को भुगतना पड़ेगा जो घर से दूर रहते हैं और दिन में कम से कम एक बार खाना बाहर से मंगवाते हैं। यदि कोई व्यक्ति महीने में 30 बार ऑर्डर करता है, तो उसे केवल प्लेटफॉर्म फीस के रूप में ही एक अच्छी-खासी रकम चुकानी होगी। बार-बार ऑर्डर करने वाले ग्राहकों के लिए यह मामूली सी लगने वाली राशि महीने के अंत में उनके बजट को असंतुलित कर सकती है।

अगस्त 2023 से अब तक का सफर: कैसे 2 रुपये से 17 रुपये पर पहुंची फीस

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स ने प्लेटफॉर्म फीस की अवधारणा अगस्त 2023 में शुरू की थी। उस समय यह प्रयोग के तौर पर केवल 2 रुपये रखी गई थी। हालांकि, एक साल से थोड़े अधिक समय में ही यह शुल्क कई गुना बढ़ गया है। जोमैटो ने पिछले सप्ताह अपनी फीस में 19 प्रतिशत की वृद्धि की थी, जिसके बाद अब स्विगी ने भी लगभग 17 प्रतिशत का इजाफा कर बाजार में अपना संतुलन बनाए रखा है। कंपनियों का तर्क है कि वे अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने के लिए यह राशि ले रही हैं, लेकिन ग्राहकों के लिए यह सीधा अतिरिक्त बोझ है।

क्या होगा आगे? भविष्य की चुनौतियां और विकल्प

आने वाले समय में यदि वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और बिगड़ते हैं, तो ईंधन की कीमतों में और उछाल आ सकता है। ऐसी स्थिति में, कंपनियां अपनी फीस में एक बार फिर बढ़ोतरी कर सकती हैं। फिलहाल, ग्राहकों के पास ‘क्लब’ या ‘गोल्ड’ जैसे सब्सक्रिप्शन प्लान्स लेने का विकल्प है, जो कुछ हद तक इन शुल्कों से राहत दे सकते हैं, लेकिन आम यूजर के लिए ऑनलाइन फूड अब ‘लक्जरी’ बनता जा रहा है।

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