SY Quraishi: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों की अनदेखी करने और उनके खिलाफ ‘आपत्तिजनक व अपमानजनक’ भाषा के प्रयोग को लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए खतरनाक बताया है। कुरैशी का मानना है कि आयोग को निष्पक्ष न केवल होना चाहिए, बल्कि दिखना भी चाहिए।

राहुल गांधी के आरोप गंभीर, जांच होनी चाहिए थी
एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कुरैशी ने कहा कि राहुल गांधी ने भले ही ‘हाइड्रोजन बम’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया हो, लेकिन वह राजनीतिक बयानबाजी थी। उन्होंने जो शिकायतें कीं, वे गंभीर हैं और चुनाव आयोग को उनका संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए थी। “उनसे शपथपत्र मांगना या धमकी भरी भाषा का प्रयोग करना आयोग की गरिमा के खिलाफ है,” उन्होंने कहा।

SIR प्रक्रिया को बताया खतरनाक कदम
बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कुरैशी ने कहा कि इससे चुनाव आयोग ने “भानुमती का पिटारा” खोल दिया है और “मधुमक्खियों के छत्ते में हाथ” डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 30 वर्षों की मेहनत से बनी मतदाता सूची को कुछ ही महीनों में बदलने की कोशिश की जा रही है, जो कि चुनावी पारदर्शिता के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
EPIC को दस्तावेजों की सूची से हटाना बड़ी चूक
कुरैशी ने मतदाता पहचान पत्र (EPIC) को वैध दस्तावेजों की सूची से बाहर करने को भी गंभीर चूक करार दिया। उन्होंने कहा, “यह चुनाव आयोग की पहचान है। इसे नकारना खुद संस्था की साख पर सवाल खड़े करता है।” उन्होंने चेताया कि इससे न केवल भ्रम फैलेगा बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद भी कमजोर होगी।
विपक्ष के साथ आयोग का रवैया चिंताजनक
एसवाई कुरैशी ने यह भी कहा कि आयोग को विपक्ष की बात सुननी चाहिए क्योंकि वे करोड़ों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। “आज स्थिति यह है कि 23 दलों को कहना पड़ रहा है कि उन्हें चुनाव आयोग से मिलने का समय नहीं मिल रहा। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है,” उन्होंने कहा।
निष्पक्षता के साथ दिखना भी जरूरी
पूर्व चुनाव आयुक्त ने कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था की सबसे बड़ी पूंजी उसकी निष्पक्षता होती है। आयोग को न केवल निष्पक्ष रहना चाहिए, बल्कि उसकी हर कार्रवाई में निष्पक्षता दिखाई भी देनी चाहिए। “डराने या धमकाने की नहीं, जांच की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी,” उन्होंने दोहराया।
एसवाई कुरैशी की टिप्पणियां केवल एक पूर्व अधिकारी की राय नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को लेकर एक गंभीर चेतावनी हैं। चुनाव आयोग जैसी संस्था की साख पर उठते सवाल निश्चित रूप से चिंताजनक हैं और इनका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से जांच और संवाद के माध्यम से दिया जाना चाहिए।
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