Syria Chemical Attack
Syria Chemical Attack : सीरिया के इतिहास के सबसे काले अध्याय, यानी 2013 के भीषण रासायनिक हमले को लेकर एक ऐतिहासिक गिरफ्तारी हुई है। देश के आंतरिक मंत्रालय ने शुक्रवार को अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल असद के शासनकाल के एक पूर्व जनरल को सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस पूर्व जनरल पर आरोप है कि उसने राजधानी दमिश्क के बाहरी इलाकों में हुए उस घातक रासायनिक हमले की योजना बनाई और उसे अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई। इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर उन जख्मों को हरा कर दिया है, जिन्होंने एक दशक पहले पूरी मानवता को शर्मसार कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस कार्रवाई को असद काल के अत्याचारों के विरुद्ध न्याय की पहली बड़ी जीत के रूप में देख रहा है।
सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान अगस्त 2013 में हुआ यह रासायनिक हमला आधुनिक इतिहास के सबसे क्रूर सैन्य अभियानों में गिना जाता है। विद्रोही नियंत्रण वाले क्षेत्रों को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में 1400 से अधिक नागरिकों की दर्दनाक मौत हुई थी। मरने वालों में सैकड़ों मासूम बच्चे और महिलाएं शामिल थीं, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और मानवाधिकार संगठनों के दावों के अनुसार, असद की सेना ने प्रतिबंधित नर्व एजेंट (सरीन गैस) का इस्तेमाल किया था। गिरफ्तार जनरल पर इन हथियारों के भंडारण से लेकर उनके उपयोग की निगरानी करने तक का बेहद संगीन आरोप है।
उस खौफनाक हमले की जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे, उन्होंने दुनिया की रूह कंपा दी थी। हर तरफ जमीन पर मासूमों के ढेर लगे थे। कई वीडियो में देखा गया कि जहर के असर से छोटे बच्चों के मुंह से झाग निकल रहा था और वे तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे थे। डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी बिना उचित संसाधनों के लोगों को सांस दिलाने की नाकाम कोशिशें कर रहे थे। उस वक्त असद सरकार ने इस हमले से पल्ला झाड़ लिया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद सीरिया को अपने रासायनिक हथियारों का जखीरा ‘ओपीसीडब्ल्यू’ को सौंपने के लिए मजबूर होना पड़ा था, जिससे एक बड़ा वैश्विक युद्ध टल गया था।
बशर अल असद ने दशकों तक सीरिया पर लोहे की मुट्ठी से शासन किया, लेकिन 2024 में आए सत्ता परिवर्तन के तूफान ने उनके साम्राज्य को उखाड़ फेंका। इस्लामी विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव के बीच असद को अपनी जान बचाकर मॉस्को में शरण लेनी पड़ी। सत्ता बदलने के साथ ही सीरिया की नई अंतरिम सरकार ने पुराने शासन के दौरान हुए युद्ध अपराधों की फाइलें खोल दी हैं। अब प्राथमिकता उन दोषियों को सजा दिलाने की है जिन्होंने सालों तक आम जनता पर दमनकारी नीतियों और घातक हथियारों का प्रयोग किया।
गिरफ्तार किए गए पूर्व जनरल खारदल अहमद दयाउब पर युद्ध अपराधों की एक लंबी फेहरिस्त है। आंतरिक मंत्रालय के मुताबिक, दयाउब ने पूर्वी घोउता पर भीषण बमबारी के लिए रसद और समन्वय का काम संभाला था। केवल रासायनिक हमला ही नहीं, बल्कि उस पर कई गैर-न्यायिक हत्याओं, प्रताड़ना शिविरों के संचालन और विदेशी ताकतों जैसे ईरान व हिजबुल्लाह के साथ मिलकर साजिश रचने के भी आरोप हैं। सीरियाई गृहयुद्ध में अब तक 5 लाख से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि दयाउब जैसी गिरफ्तारियां देश में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए अनिवार्य हैं, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।
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