T20 World Cup 2026: पाकिस्तान क्रिकेट जगत में एक बार फिर अराजकता और अव्यवस्था का माहौल है। टी20 विश्व कप 2026 में टीम के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद अब खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर जो खुलासे हो रहे हैं, उन्होंने चयनकर्ताओं और मेडिकल पैनल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे किसी ‘कॉमेडी सर्कस’ से कम नहीं कहा जा सकता, जहाँ चयन समिति को यह तक पता नहीं होता कि जिन सितारों को वे देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए मैदान पर उतार रहे हैं, वे शारीरिक रूप से खेलने के लिए सक्षम भी हैं या नहीं। ताजा विवाद कप्तान बाबर आजम और विस्फोटक बल्लेबाज फखर जमां की चोटों को छिपाने से जुड़ा है, जिससे पूरे पीसीबी (PCB) में खलबली मच गई है।
इस पूरे विवाद की जड़ पिछले हफ्ते चयन समिति के सदस्य आकिब जावेद द्वारा दिया गया वह बयान है, जिसमें उन्होंने टीम के खराब प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए बाबर और फखर की फिटनेस पर संदेह जताया था। उनकी मांग पर पीसीबी ने एक उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के सूत्रों के अनुसार, यूके के प्रसिद्ध स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ डॉ. जावेद मुगल, जो हाल ही में पीसीबी के मेडिकल पैनल में शामिल हुए हैं, उन्होंने विश्व कप के बाद दोनों खिलाड़ियों का विस्तृत परीक्षण किया। उनकी रिपोर्ट ने बोर्ड के होश उड़ा दिए हैं, क्योंकि इसमें स्पष्ट कहा गया है कि टूर्नामेंट के दौरान दोनों खिलाड़ी पूरी तरह फिट नहीं थे।
बाबर आजम की फिटनेस का मुद्दा तब और गहरा गया जब विश्व कप से लौटने के तुरंत बाद उन्होंने हैमस्ट्रिंग की समस्या का हवाला देते हुए आगामी मैचों से अपना नाम वापस ले लिया। डॉ. जावेद मुगल की रिपोर्ट के अनुसार, बाबर की चोट को शुरुआत में जितना मामूली समझा गया था, वह वास्तव में उससे कहीं अधिक गंभीर थी। हैरानी की बात यह है कि हैमस्ट्रिंग जैसी संवेदनशील चोट के बावजूद उन्हें विश्व कप जैसे बड़े मंच पर खिलाया गया, जिससे न केवल उनकी व्यक्तिगत सेहत को खतरा हुआ, बल्कि टीम के प्रदर्शन पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा। यही हाल फखर जमां का भी रहा, जो पिछले कई महीनों से लगातार शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे थे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर अनफिट होने के बावजूद इन खिलाड़ियों को स्क्वाड में जगह कैसे मिली? पीसीबी के भीतर से आ रही खबरों के मुताबिक, राष्ट्रीय चयन समिति ने अपना पल्ला झाड़ते हुए सारा दोष मेडिकल टीम पर मढ़ दिया है। सूत्रों का कहना है कि टीम के फिजियोथेरेपिस्ट क्लिफ डीकन ने इन दोनों खिलाड़ियों को फिटनेस क्लीयरेंस दी थी। क्लिफ डीकन पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि उनके कुछ सीनियर खिलाड़ियों के साथ बहुत करीबी संबंध हैं, जिसके कारण वे अक्सर मामूली चोटों को नजरअंदाज कर खिलाड़ियों को ‘फिट’ होने का प्रमाण पत्र दे देते हैं। यह पेशेवर क्रिकेट के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।
इस खुलासे ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के भीतर व्याप्त भाई-भतीजावाद और लापरवाही को पूरी तरह नंगा कर दिया है। जब एक अंतरराष्ट्रीय टीम के पास आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ उपलब्ध हों, तब इस तरह की चूक किसी बड़े घोटाले से कम नहीं है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पीसीबी अपने मेडिकल प्रोटोकॉल और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाएगा, तब तक टीम का प्रदर्शन इसी तरह गिरता रहेगा। अब देखना यह है कि क्या बोर्ड क्लिफ डीकन और उन जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई करता है जिन्होंने पाकिस्तान की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर अनफिट खिलाड़ियों को मैदान में भेजा।
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