राजनीति

Tamil Nadu Election: एनडीए में सीट शेयरिंग फॉर्मूला तैयार, शाह और पलानीस्वामी की मुलाकात पर टिकीं नजरें

Tamil Nadu Election: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की बिसात बिछ चुकी है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए ‘सीट शेयरिंग’ की तस्वीर साफ करने में जुट गया है। राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के अनुसार, पीएमके (PMK) का आगामी चुनाव में एनडीए के साथ रहना लगभग तय हो चुका है। सूत्रों का कहना है कि अंबुमणि रामदास के नेतृत्व वाले पीएमके गुट को गठबंधन में 18 विधानसभा सीटें और एक राज्यसभा सीट देने पर सहमति बन गई है। इस रणनीतिक तालमेल को अंतिम रूप देने के लिए एआईएडीएमके (AIADMK) प्रमुख ई. पलानीस्वामी दिल्ली के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जहाँ वे गठबंधन की बारीकियाँ तय कर रहे हैं।

अमित शाह और ईपीएस की बैठक: अंतिम मुहर की तैयारी

बुधवार शाम को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी के बीच होने वाली मुलाकात को तमिलनाडु की राजनीति का ‘टर्निंग पॉइंट’ माना जा रहा है। इस उच्च-स्तरीय बैठक में भाजपा, एआईएडीएमके और पीएमके के बीच सीटों के अंतिम बंटवारे और साझा चुनावी घोषणापत्र पर चर्चा होने की उम्मीद है। भाजपा जहाँ राज्य में एक संगठित और सशक्त विकल्प पेश करना चाहती है, वहीं एआईएडीएमके गठबंधन की धुरी बने रहकर अपने क्षेत्रीय वर्चस्व को सुरक्षित रखने की कोशिश में है। यह बैठक तय करेगी कि आगामी चुनाव में एनडीए का चेहरा और रणनीति क्या होगी।

जातीय समीकरण और वन्नियार वोट बैंक का महत्व

एनडीए की रणनीति में पीएमके की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्तर और मध्य तमिलनाडु में पीएमके का ‘वन्नियार’ वोट बैंक निर्णायक माना जाता है। 18 सीटें देकर गठबंधन ने न केवल जातीय संतुलन साधने की कोशिश की है, बल्कि पीएमके को एक राज्यसभा सीट का आश्वासन देकर राष्ट्रीय स्तर पर उनके कद को सम्मान देने का संकेत भी दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वन्नियार वोट बैंक पूरी तरह एनडीए के पक्ष में लामबंद होता है, तो डीएमके (DMK) के लिए अपने गढ़ को बचाना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

2021 के नतीजों से सबक: वोट शेयर बढ़ाने की चुनौती

2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े एनडीए के लिए एक मार्गदर्शक की तरह हैं। पिछले चुनाव में एआईएडीएमके और भाजपा ने मिलकर 75 सीटें जीती थीं, जिसमें एआईएडीएमके ने 66 और भाजपा ने 4 सीटों पर कब्जा किया था। हालांकि, वोट शेयर के मामले में डीएमके (38%) एनडीए (33% एआईएडीएमके और 2.6% भाजपा) से आगे रही थी। इस बार भाजपा का लक्ष्य अपने व्यक्तिगत वोट शेयर को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ मिलकर डीएमके के 5% के उस अंतर को पाटना है जिसने पिछली बार सत्ता की चाबी छीन ली थी।

अमित शाह का ‘मास्टर प्लान’ और सोशल इंजीनियरिंग

गृह मंत्री अमित शाह की हालिया तमिलनाडु यात्रा ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। भाजपा इस बार कोयंबटूर, मदुरै और चेन्नई जैसे शहरी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी की नजर चेन्नई की उन सीटों पर है जहाँ हिंदी भाषी और मध्यम वर्गीय मतदाता निर्णायक हैं। शाह की रणनीति केवल भाजपा को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एआईएडीएमके के बिखरे हुए धड़ों (ओ. पन्नीरसेल्वम और टीटीवी दिनाकरन) को भी ईपीएस के नेतृत्व में वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि यह ‘सोशल इंजीनियरिंग’ सफल रहती है, तो रामेश्वरम से लेकर चेन्नई तक एनडीए एक अभेद्य किला बन सकता है।

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