Tamil Nadu SIR Controversy : तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक की अध्यक्षता में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) को लेकर सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान सत्तारूढ़ टीवीके गठबंधन और विपक्षी द्रमुक (DMK) के प्रतिनिधियों ने विरोध जताते हुए वॉकआउट कर दिया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। विपक्षी दलों और टीवीके ने मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा।
टीवीके ने SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक से बाहर आने के बाद विजय सरकार में मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी शुरुआत से ही SIR प्रक्रिया का विरोध कर रही है। उन्होंने प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए और कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। निर्मल कुमार ने दावा किया कि यदि यह प्रक्रिया नहीं हुई होती, तो पिछले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी 160 से अधिक सीटें जीत सकती थी। यह उनका राजनीतिक दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
सीटीआर निर्मल कुमार ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है और मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। टीवीके प्रतिनिधियों ने विरोध जताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी की। इस विवाद के बीच मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया और उसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
DMK ने 74 लाख से अधिक नाम हटाए जाने पर मांगा जवाब
तमिलनाडु में विपक्षी द्रमुक ने भी मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग को घेरा। पार्टी के कानूनी विभाग के सचिव आई परंथमन ने सवाल उठाया कि राज्य में 74 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की वजह क्या है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधियों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने अपना पक्ष रखा और उसके बाद बैठक से बाहर चले गए। DMK ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारणों और प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि, हटाए गए नामों की संख्या और उसके पीछे के कारणों को समझने के लिए संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और आदेशों की पुष्टि जरूरी है।
17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR
चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) का आदेश दिया है। इसके लिए 1 जनवरी को पात्रता तिथि निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है। SSR के तहत मौजूदा मतदाता सूची में आवश्यक सुधार, नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और गलत प्रविष्टियों को ठीक करने जैसे काम किए जाते हैं। इसके विपरीत, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में मतदाता सूची की अधिक व्यापक जांच की जाती है। दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन रखना है, लेकिन इनके तरीके और दायरे अलग-अलग होते हैं।
SIR को लेकर देशभर में जारी है विरोध
SIR प्रक्रिया को लेकर कई विपक्षी दलों ने कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। वे प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दिल्ली में भी इस मुद्दे पर प्रदर्शन होने की जानकारी सामने आई है। कॉकरोच जनता पार्टी सहित कुछ समूहों ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई है। हालांकि, इन आरोपों और मांगों के बीच चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा संबंधित आंकड़ों का सत्यापन महत्वपूर्ण है।
आगे क्या होगा?
तमिलनाडु में सर्वदलीय बैठक से प्रतिनिधियों के बाहर निकलने के बाद SIR और SSR को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। टीवीके और DMK दोनों ने मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाए हैं, जबकि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग इन आपत्तियों पर क्या जवाब देता है और मतदाता सूची से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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