Tank Ram Verma
Tank Ram Verma: धमतरी के भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मंत्री वर्मा ने केंद्र सरकार की नई योजनाओं का बखान करते हुए न केवल कांग्रेस की नीतियों की आलोचना की, बल्कि वैचारिक मुद्दों पर भी अपनी राय खुलकर रखी। उनके इस बयान के बाद राज्य में एक नई राजनीतिक बहस छिड़ने की संभावना है।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ‘गोडसेवादी सोच’ वाले बयान पर कड़ा पलटवार किया। पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा कि नाथूराम गोडसे एक राष्ट्रवादी व्यक्ति थे। वर्मा ने तर्क दिया कि कांग्रेस हमेशा से ही महापुरुषों के नाम पर राजनीति करती आई है और विचारधारा के नाम पर जनता को भ्रमित करती रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा की विचारधारा राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित है।
मंत्री वर्मा ने कांग्रेस पार्टी पर सरकारी योजनाओं के नामकरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में पहले योजनाएं किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं हुआ करती थीं, लेकिन कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम जोड़कर योजनाओं का राजनीतिकरण किया। उन्होंने दावा किया कि जब भी कांग्रेस को अवसर मिला, उसने स्थापित महापुरुषों के नाम हटाकर अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर योजनाएं थोपने का काम किया।
6 जनवरी को धमतरी प्रवास के दौरान मंत्री ने ‘विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम 2025’ को मोदी सरकार की एक क्रांतिकारी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित होगा। यह अधिनियम किसानों, मजदूरों और समाज के अंतिम व्यक्ति को प्राथमिकता देने की भाजपा की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने 2014 के संसद के उस भाषण को याद किया जिसमें पीएम मोदी ने अपनी सरकार को गरीबों को समर्पित बताया था।
मंत्री टंकराम वर्मा ने नए अधिनियम की तुलना मनरेगा से करते हुए इसे अधिक प्रभावी और उन्नत बताया। उन्होंने घोषणा की कि मनरेगा में जहां साल में केवल 100 दिनों के रोजगार का प्रावधान था, वहीं ‘जी-राम-जी अधिनियम’ के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाएगी। इससे ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और पलायन जैसी समस्याओं पर भी लगाम लगेगी।
मजदूरों के हितों की रक्षा करते हुए मंत्री ने बताया कि अब मजदूरी का भुगतान महज सात दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने एक नई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं होता है, तो मजदूरों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी। इस अतिरिक्त राशि को मजदूरी पर मिलने वाले ब्याज के रूप में माना जाएगा। यह कदम भुगतान में होने वाली देरी की पुरानी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए उठाया गया है।
मंत्री ने विश्वास जताया कि इस नए अधिनियम के लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। उन्होंने पूर्ववर्ती योजनाओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले काम केवल कागजों पर सिमट जाते थे, लेकिन अब जल संरक्षण, नाली निर्माण, सड़क निर्माण और व्यापक वृक्षारोपण जैसे कार्य धरातल पर नजर आएंगे। यह योजना किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र की आजीविका सुधारने के लिए बनाई गई है।
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