Telangana Maoist Surrender
Telangana Maoist Surrender: तेलंगाना की राजधानी में शुक्रवार का दिन आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से ऐतिहासिक रहा। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की उपस्थिति में माओवादी संगठन के 130 सक्रिय कैडरों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर हिंसा का मार्ग त्याग दिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर कुल 4 करोड़ 18 लाख 20 हजार रुपये का सामूहिक इनाम घोषित था। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में कैडरों का मुख्यधारा में लौटना माओवादी आंदोलन की कमर तोड़ने जैसा है। यह घटना दर्शाती है कि अब संगठन के भीतर वैचारिक बिखराव और सुरक्षा बलों का दबाव चरम पर है।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में केवल निचले स्तर के सदस्य ही नहीं, बल्कि संगठन के रणनीतिकार भी शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इनमें 3 स्टेट कमेटी मेंबर, 1 रीजनल कमेटी मेंबर, और 10 डिवीजनल स्तर के नेता शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 40 एरिया कमेटी मेंबर और करीब 70 सक्रिय पार्टी सदस्यों ने भी अपने हथियार डाले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश कैडर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों से ताल्लुक रखते हैं, जो अंतर-राज्यीय ऑपरेशनों में पुलिस की बढ़ती सक्रियता और समन्वय को उजागर करता है।
इस सामूहिक आत्मसमर्पण से माओवादियों की सैन्य शाखा, पीएलजीए (PLGA) को सबसे गहरा आघात पहुँचा है। आत्मसमर्पण करने वालों में PLGA बटालियन के 42 कैडर, तेलंगाना स्टेट कमेटी के 30, और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के 32 सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा, केंद्रीय समिति के प्रभावशाली सदस्य ‘देवजी’ की टीम के 10 सदस्यों ने भी आत्मसमर्पण किया है। देवजी की टीम को संगठन की सबसे घातक इकाइयों में से एक माना जाता रहा है, और इसके सदस्यों का मुख्यधारा में आना नक्सली नेतृत्व के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है।
हथियारों के समर्पण के बिना किसी भी नक्सली आत्मसमर्पण को पूर्ण नहीं माना जाता। इस अवसर पर नक्सलियों ने पुलिस को 124 अत्याधुनिक हथियार सौंपे। बरामद हथियारों की सूची में 31 AK-47 राइफलें, 21 इंसास (INSAS) राइफलें, 38 एसएलआर (SLR) व .303 राइफलें और एक अत्यंत घातक इंसास एलएमजी (लाइट मशीन गन) शामिल है। इतने बड़े जखीरे का पुलिस के कब्जे में आना यह सुनिश्चित करता है कि आने वाले समय में इन क्षेत्रों में हिंसक घटनाओं में भारी कमी आएगी।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि सरकार की पुनर्वास नीति का उद्देश्य केवल दमन नहीं, बल्कि सुधार है। उन्होंने कहा कि जो भी उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सम्मानजनक जीवन और नई शुरुआत के सभी रास्ते खुले हैं। सुरक्षा बलों के निरंतर ‘ऑपरेशन प्रहार’ और सरकार द्वारा प्रदान की जा रही आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा के कारण ही आज माओवादी कैडर जंगल छोड़ बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।
इस घटनाक्रम पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने इसे बस्तर में शांति बहाली के लिए एक अनिवार्य कदम बताया। शर्मा ने कहा, “तेलंगाना में आत्मसमर्पण करने वाली बटालियन-1 हमारे क्षेत्र में आतंक का पर्याय थी। इसमें बस्तर की एक बड़ी टीम शामिल है, जिनका मुख्यधारा में आना हमारे लिए सुखद है।” उन्होंने विश्वास जताते हुए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
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