Telangana Assembly Bill 2026: तेलंगाना की राजनीति और सामाजिक संरचना में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य की कांग्रेस सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ी एक पुरानी और अनिवार्य शर्त को खत्म कर दिया है। शनिवार को तेलंगाना विधानसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया गया, जिसके तहत अब दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति भी स्थानीय निकाय चुनाव (पंचायत और नगरपालिका) लड़ने के लिए पात्र होंगे। इस निर्णय के साथ ही राज्य में पिछले तीन दशकों से चली आ रही अयोग्यता की शर्त समाप्त हो गई है।
Telangana Assembly Bill 2026: 30 साल पुरानी जनसंख्या नीति की समीक्षा और ऐतिहासिक फैसला
तेलंगाना की पंचायत राज मंत्री दानसारी अनुसूया सीताक्का ने सदन में ‘तेलंगाना पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया। विधेयक पेश करते हुए उन्होंने कहा कि दो बच्चों का नियम वर्ष 1994 में अविभाजित आंध्र प्रदेश के दौरान लागू किया गया था। उस समय का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या विस्फोट को रोकना और खाद्य सुरक्षा, बेरोजगारी व गरीबी जैसी चुनौतियों से निपटना था। हालांकि, 30 साल बाद अब राज्य की जनसांख्यिकीय स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है, जिसे देखते हुए इस नियम की समीक्षा करना अनिवार्य हो गया था।
Telangana Assembly Bill 2026: तेलंगाना में घटती प्रजनन दर ने बढ़ाई सरकार की चिंता
मंत्री सीताक्का ने सदन को सूचित किया कि वर्तमान में तेलंगाना के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल प्रजनन दर (TFR) गिरकर 1.7 पर पहुँच गई है। यह आंकड़ा प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level) से काफी नीचे है। सरकार का मानना है कि यदि प्रजनन दर इसी स्तर पर बनी रही या और कम हुई, तो भविष्य में राज्य की जनसंख्या का संतुलन बिगड़ जाएगा। बुजुर्गों की संख्या बढ़ेगी और कार्यशील युवा आबादी कम हो जाएगी, जिससे तेलंगाना के आर्थिक और सामाजिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए 2.1 की प्रजनन दर का लक्ष्य
सरकार ने आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और पंचायत राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी समाज की जनसंख्या को स्थिर और संतुलित रखने के लिए प्रजनन दर का 2.1 होना आवश्यक है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि दो बच्चों के नियम को हटाने का उद्देश्य लोगों को प्रोत्साहित करना है ताकि राज्य की जनसांख्यिकी में सुधार हो सके और विकास की गति बाधित न हो।
पंचायत राज अधिनियम, 2018 में संशोधनों को मिली मंजूरी
इस बदलाव को कानूनी रूप देने के लिए सरकार ने तेलंगाना पंचायत राज अधिनियम, 2018 की संबंधित धाराओं में संशोधन का प्रस्ताव रखा। इस विधेयक के पारित होने के बाद अब स्थानीय स्तर पर नेतृत्व करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बच्चों की संख्या बाधा नहीं बनेगी। विधानसभा के सदस्यों ने इस कदम की सराहना की और सदन ने ध्वनि मत से विधेयक को अपनी स्वीकृति दे दी।
चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को मिली बड़ी राहत
इस नए कानून का सीधा लाभ उन हजारों स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलेगा, जो दो से अधिक बच्चे होने के कारण अब तक चुनाव लड़ने से वंचित थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्णय से आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ेगी और अधिक लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे। साथ ही, यह कानून अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है जो वर्तमान में गिरती प्रजनन दर की समस्या का सामना कर रहे हैं।
















