Telangana Chicken Crisis: तेलंगाना के मांस बाजार में आज से एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। राज्य के ‘चिकन शॉप ओनर्स एसोसिएशन’ ने पोल्ट्री कंपनियों की मनमानी के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। बुधवार, 1 अप्रैल से पूरे राज्य में चिकन की दुकानों पर ताले लटक गए हैं। दुकानदारों का आरोप है कि बड़ी पोल्ट्री कंपनियां उन्हें आर्थिक रूप से बर्बाद करने पर तुली हुई हैं। इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता की थाली पर पड़ने वाला है, क्योंकि आपूर्ति रुकने से आने वाले दिनों में कीमतों में भारी उछाल आने की पूरी संभावना है।

राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान: 50 हजार से अधिक खुदरा दुकानें बंद
एसोसिएशन के निर्णय के अनुसार, बुधवार से तेलंगाना के कोने-कोने में चिकन की खुदरा बिक्री पूरी तरह ठप कर दी गई है। राज्य भर में लगभग 50,000 से अधिक छोटी और मध्यम चिकन की दुकानें इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं। हालांकि, कॉर्पोरेट आउटलेट्स और बड़े रिटेल चेन को इस हड़ताल से बाहर रखा गया है, लेकिन बाजार का बड़ा हिस्सा स्थानीय दुकानों पर निर्भर होने के कारण आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है। दुकान मालिकों का कहना है कि यह उनकी आजीविका बचाने की लड़ाई है और वे अब पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
कमीशन में भारी कटौती: 26 रुपये से घटकर 16 रुपये हुआ मार्जिन
विवाद की मुख्य जड़ पोल्ट्री कंपनियों द्वारा खुदरा विक्रेताओं को दिए जाने वाले लाभ मार्जिन (Profit Margin) में की गई भारी कटौती है। पिछले दो दशकों से, एक स्थापित व्यवस्था के तहत दुकानदारों को प्रति किलोग्राम चिकन की बिक्री पर 26 रुपये का मार्जिन मिलता था। लेकिन हाल ही में कंपनियों ने इसे घटाकर महज 16 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है। दुकानदारों का तर्क है कि जहां एक तरफ महंगाई बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उनकी कमाई को करीब 40% तक कम कर दिया गया है, जिससे उनके लिए दुकान चलाना नामुमकिन हो गया है।
एसोसिएशन की दलील: लागत बढ़ी पर कमाई हुई आधी
चिकन शॉप ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नेल्लुतला शेखर ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही बाजार में चिकन की कीमतें 350 से 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हों, लेकिन इसका फायदा छोटे दुकानदारों को नहीं मिल रहा है। एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि दुकान का किराया, बिजली बिल और लेबर (श्रम) की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 16 रुपये के मार्जिन पर व्यापार करना घाटे का सौदा है। उनकी प्रमुख मांग है कि इस मार्जिन को बढ़ाकर 30 रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए।
आपूर्ति पर संकट: बाजार में चिकन की कमी और कीमतों में तेजी की आशंका
इस बड़े पैमाने पर हो रही हड़ताल का असर पहले ही दिन से दिखने लगा है। बाजारों में मुर्गों की आवक बंद हो गई है, जिससे होटलों और घरों में चिकन की सप्लाई बाधित हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह हड़ताल दो-तीन दिन और खिंचती है, तो बचे हुए स्टॉक की कीमतें आसमान छू सकती हैं। शादियों और अन्य समारोहों के सीजन में इस तरह की बंदी से आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग अब विकल्प के तौर पर अन्य मांस या सब्जियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे वहां भी कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग: कब तक जारी रहेगी तालाबंदी?
संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक पोल्ट्री कंपनियां टेबल पर आकर बातचीत नहीं करतीं और मार्जिन बढ़ाने का ठोस आश्वासन नहीं देतीं, तब तक दुकानें नहीं खुलेंगी। उन्होंने तेलंगाना सरकार से भी अपील की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे। दुकानदारों की मांग है कि सरकार बड़े कॉर्पोरेट घरानों और छोटे व्यापारियों के बीच मध्यस्थता कर एक न्यायपूर्ण दर निर्धारित करे। वर्तमान में, पोल्ट्री उद्योग और खुदरा विक्रेताओं के बीच का यह गतिरोध सुलझता नजर नहीं आ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में मांस प्रेमियों की मुश्किलें और बढ़ना तय है।


















