Jana Nayakan Controversy
Jana Nayakan Controversy: तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ अपनी रिलीज से पहले ही कानूनी पचड़ों में बुरी तरह फंस गई है। फिल्म के निर्माताओं और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के बीच चल रही तकरार अब मद्रास हाईकोर्ट के गलियारों में एक नया मोड़ ले चुकी है। फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने के कारण मामला पहले सिंगल बेंच और फिर डिवीजन बेंच तक पहुंचा। अब हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने फिल्म की रिलीज की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है और प्रशंसकों के बीच मायूसी का माहौल है।
मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के उस फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें सेंसर बोर्ड (CBFC) को तुरंत सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया गया था। चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने CBFC की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि सिंगल जज ने फिल्म की सामग्री और उससे जुड़ी शिकायतों के गुण-दोष (Merits) पर विचार करने में प्रक्रियात्मक चूक की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिट कोर्ट को फिल्म के कंटेंट के तकनीकी पहलुओं में इतनी गहराई से हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था।
‘जन नायकन’ को थलापति विजय के फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म माना जा रहा है। विजय ने पहले ही घोषणा कर दी है कि इस फिल्म के बाद वह अपने राजनीतिक दल ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ के माध्यम से पूरी तरह राजनीति में समर्पित हो जाएंगे। यही कारण है कि इस फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज है। फिल्म को मूल रूप से 9 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देनी थी, लेकिन सेंसर बोर्ड से क्लीयरेंस न मिलने की वजह से इसकी रिलीज अनिश्चितकाल के लिए टल गई है।
विवाद की मुख्य वजह फिल्म में दिखाए गए कुछ दृश्य हैं। सेंसर बोर्ड की जांच समिति का आरोप है कि फिल्म में सशस्त्र बलों (Armed Forces) का चित्रण सही तरीके से नहीं किया गया है और कुछ दृश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा सकते हैं। हालांकि, फिल्म के निर्माता KVN प्रोडक्शंस का दावा है कि उन्होंने बोर्ड द्वारा सुझाए गए सभी कट्स को स्वीकार कर लिया था, फिर भी जानबूझकर सर्टिफिकेट जारी करने में देरी की गई। यह भी चर्चा का विषय रहा कि फिल्म के खिलाफ शिकायत जांच समिति के ही एक सदस्य ने दर्ज कराई थी।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर थलापति विजय के प्रशंसकों ने अपना विरोध दर्ज कराया। कई प्रशंसकों ने इसे विजय के राजनीतिक उदय को रोकने की साजिश करार दिया, तो कई ने ‘Release Jan Nayakan’ जैसे हैशटैग चलाकर अपना समर्थन जताया। विजय की लोकप्रियता का आलम यह है कि फिल्म की रिलीज में हो रही हर दिन की देरी उनके चाहने वालों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रही है।
डिवीजन बेंच ने अब मामला वापस सिंगल जज के पास भेज दिया है और याचिकाकर्ताओं को अपनी दलीलों में संशोधन करने की अनुमति दी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब कानूनी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू होगी, जिसमें काफी समय लग सकता है। जब तक सिंगल बेंच दोबारा सुनवाई कर कोई नया आदेश जारी नहीं करती, तब तक फिल्म का भविष्य अधर में लटका रहेगा। दर्शकों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे अपने चहेते सुपरस्टार को आखिरी बार बड़े पर्दे पर देख पाएंगे या यह कानूनी लड़ाई और लंबी खिंचेगी।
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