Thiruvananthapuram Mayor
Thiruvananthapuram Mayor: केरल की राजनीतिक भूमि पर एक युगांतरकारी परिवर्तन देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता वी.वी. राजेश ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पहले भाजपा मेयर के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया है। यह जीत केवल एक पद की प्राप्ति नहीं है, बल्कि केरल की राजधानी में पिछले 45 वर्षों से चले आ रहे वामपंथी शासन के निर्बाध एकाधिकार का अंत भी है। नगर निगम के नवनिर्वाचित भाजपा पार्षदों और जिला स्तर के वरिष्ठ नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के राज्य महासचिव एस. सुरेश ने आधिकारिक रूप से राजेश के नाम की घोषणा की। यह निर्णय राज्य और जिला नेतृत्व के बीच कई दौर की गहन चर्चाओं और रणनीतिक विमर्श के बाद लिया गया है।
वी.वी. राजेश का मेयर बनना केरल की शहरी राजनीति में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का एक बड़ा प्रतीक माना जा रहा है। राजेश केवल एक पार्षद नहीं, बल्कि संगठन के एक मंझे हुए खिलाड़ी हैं। उनके राजनीतिक सफर पर नज़र डालें तो वह दो बार पार्षद, भाजपा के राज्य सचिव, युवा मोर्चा के पूर्व राज्य अध्यक्ष और तिरुवनंतपुरम जिला अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पिछली विधानसभा के कार्यकाल के दौरान, उन्हें विपक्ष के एक प्रखर नेता के रूप में देखा गया था। विशेष रूप से, उन्होंने सीपीआईएम (CPIM) शासित नगर निगम में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एक लंबे ‘सत्याग्रह’ का नेतृत्व किया था, जिसने जनता के बीच उनकी छवि एक जुझारू नेता की बनाई।
मेयर पद के चयन की प्रक्रिया काफी दिलचस्प रही। शुरुआत में, केरल की पहली महिला पुलिस महानिदेशक (DGP) रहीं आर. श्रीलेखा का नाम इस दौड़ में सबसे आगे चल रहा था। हालांकि, पार्टी के भीतर एक गुट का मानना था कि किसी अनुभवी संगठनकर्ता को ही यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। स्थानीय स्तर पर मतभेदों के उभरने के बाद, भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने हस्तक्षेप किया। अंततः दिल्ली से आए निर्देशों और स्थानीय समीकरणों को देखते हुए वी.वी. राजेश के नाम पर सर्वसम्मति बनी। उनके अनुभव और प्रशासनिक समझ को देखते हुए यह माना गया कि वह 100 वार्डों वाले इस विशाल निगम को कुशलतापूर्वक चलाने में सक्षम हैं।
तिरुवनंतपुरम नगर निगम के चुनावी नतीजों ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। कुल 100 वार्डों में से भाजपा ने अकेले 50 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत का आंकड़ा छू लिया और चार दशकों के वामपंथी वर्चस्व को उखाड़ फेंका। दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) ने भी अपनी सीटों की संख्या में सुधार किया और 19 सीटें हासिल कीं। वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF), जो दशकों से यहाँ सत्ता में था, केवल 29 सीटों पर सिमट कर रह गया। दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, जबकि एक सीट पर उम्मीदवार के निधन के कारण मतदान स्थगित कर दिया गया था।
भाजपा की यह जीत केवल तिरुवनंतपुरम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे केरल के लिए एक राजनीतिक संदेश है। राजधानी में मिली इस सफलता ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। वी.वी. राजेश के नेतृत्व में अब भाजपा के सामने चुनौती होगी कि वह सुशासन और विकास के अपने वादों पर खरा उतरे। भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और नागरिक सुविधाओं में सुधार राजेश की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि साढ़े चार दशक पुराने वामपंथी ढांचे को बदलने के लिए नई मेयर परिषद किस तरह के नीतिगत बदलाव लागू करती है।
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