छत्तीसगढ़

मानव तस्करी और अवयस्कों के अपहरण के मामले में तीन आरोपी दोषी करार, विशेष न्यायालय ने सुनाई 14 साल की सजा

Ambikapur News : अंबिकापुर स्थित विशेष न्यायालय (एन.आई.ए.) ने एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले में तीन आरोपियों को नाबालिग बच्चों के अपहरण, सदोष परिरोध और मानव तस्करी जैसे अपराधों में दोषसिद्ध करार दिया है।

पीठासीन अधिकारी केएल चरयाणी की अदालत ने विमला यादव 36 वर्ष निवासी कांसाबेल जशपुर, नीलू उर्फ निर्मला नायक 31 वर्ष निवासी बिजावर छत्तरपुर, मध्यप्रदेश और कोमल अहिरवार 33 वर्ष निवासी बिजावर, छत्तरपुर मध्यप्रदेश को विभिन्न धाराओं के तहत कठोर सजा सुनाई। इस मामले में तीनों अभियुक्तों ने मिलकर आपराधिक षड्यंत्र के तहत तीन अवयस्क बच्चों को बहला-फुसलाकर उनका शोषण करने की योजना बनाई थी।

विशेष न्यायालय (एन.आई.ए.) अंबिकापुर के पीठासीन अधिकारी केएल चरयाणी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 363, 365, 366क, 368 और 370 के अंतर्गत तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए कठोर कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।

अदालत में प्रस्तुत अभियोजन पक्ष के अनुसार, दिनांक 12 अप्रैल से 18 अप्रैल 2024 के बीच ग्राम पुराईनबंध से तीन नाबालिग बच्चों को बहला-फुसलाकर अपहरण किया गया। आरोपी विमला यादव ने नीलू उर्फ ठुनी नायक और उसके पति कोमल अहिरवार के साथ मिलकर इन बच्चों को अपने आधिपत्य में लिया और उन्हें कथित विवाह के बहाने लड़कों से मिलवाने हेतु प्रेरित किया। न्यायालय ने पाया कि इसका उद्देश्य पीड़ितों को अयुक्त संभोग के लिए विवश करना और उनके साथ मानव तस्करी के जरिये लाभ अर्जित करना था।

न्यायालय का निर्णय:

विशेष न्यायालय ने निर्णय में कहा कि यदि पीड़िता क्रमांक 1 का विवाह उस समय हो गया होता, तो वह निश्चित रूप से अयुक्त संभोग के लिए विवश होती। इस तथ्य के आधार पर अदालत ने इसे सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र और मानव तस्करी का गंभीर मामला माना।

न्यायालय ने तीनों आरोपियों को सजा सुनाई:

न्यायालय ने तीनों आरोपियों को धारा 363, 365 (व 368 समाहित): 3-3 वर्ष का कठोर कारावास एवं ₹1000/- का अर्थदंड, धारा 366क: 4-4 वर्ष का कठोर कारावास एवं ₹1000/- का अर्थदंड, धारा 370 (मानव तस्करी): 14-14 वर्ष का कठोर कारावास एवं ₹5000/- का अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त साधारण कारावास भी जोड़ा गया है।

न्यायिक टिप्पणी का महत्व:

यह फैसला यह संकेत देता है कि नाबालिगों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा, शोषण या तस्करी के मामलों में न्यायपालिका सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों को कठोर दंड देने से पीछे नहीं हटेगी। यह निर्णय भविष्य में मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों को लेकर एक चेतावनी की तरह देखा जा सकता है।

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