TMC Crisis Kirti Azad : रविवार (14 जून 2026) की सुबह देश की सियासत में उस वक्त हलचल बढ़ गई, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद कीर्ति आज़ाद और सागरिका घोष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के आवास पर पहुंचे। दोनों नेता वहां एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपने के उद्देश्य से गए थे। जब मीडिया कर्मियों ने उनसे सवाल किया कि क्या वे पहले से अपॉइंटमेंट लेकर आए हैं, तो कीर्ति आज़ाद ने बेहद सहजता से उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि अगर स्पीकर महोदय के पास समय होगा, तो वे उनसे मुलाकात करेंगे। यदि किसी कारणवश समय नहीं मिल पाता है, तो वे केवल अपना आवेदन देकर ससम्मान वापस लौट जाएंगे।

संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला
कीर्ति आज़ाद ने मीडिया से बातचीत के दौरान कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा मामला पूरी तरह से साफ और पारदर्शी है। उन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने पहले ही इस विषय को स्पष्ट कर दिया है। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद 4 के प्रावधानों के तहत इस प्रकार के किसी भी राजनीतिक बंटवारे को स्वीकार नहीं किया जा सकता। आजाद ने महाराष्ट्र में हुए पिछले सियासी घटनाक्रम को पूरी तरह से गलत ठहराया और कहा कि इसी तरह की असंवैधानिक गतिविधियों को रोकने के लिए उनकी पार्टी यह आवेदन लेकर लोकसभा स्पीकर के पास आई है।

“जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया”
पार्टी से बगावत करने वाले सांसदों पर निशाना साधते हुए कीर्ति आज़ाद ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने बागी सांसदों के व्यवहार को पूरी तरह से असंवैधानिक करार दिया। उनका कहना था कि भारतीय संविधान के नियमों के मुताबिक संसद के भीतर इस तरह का कोई भी अलग या समानांतर समूह नहीं बनाया जा सकता। आज़ाद ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिन नेताओं को तृणमूल कांग्रेस ने अपनी पहचान दी, आगे बढ़ने का अवसर दिया और संसद तक पहुंचाया, वे ही आज अपनी मूल पार्टी की पीठ में छुरा घोंप रहे हैं। उन्होंने मुहावरे का प्रयोग करते हुए कहा, “इन लोगों ने जिस थाली में खाया, उसी थाली में छेद किया है।” इसी गंभीर शिकायत को दर्ज कराने के लिए वे स्पीकर के घर पहुंचे थे।
अभिषेक बनर्जी ने लिखा पत्र
इस पूरे घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता अभिषेक बनर्जी ने भी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपनी मांगें सामने रखी हैं। बनर्जी ने अपने पत्र में पुरजोर तरीके से यह मांग की है कि संसद के भीतर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) को केवल एक ही संगठित राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि सदन में पार्टी का प्रतिनिधित्व सिर्फ और सिर्फ आधिकारिक तौर पर नियुक्त नेता और अधिकृत व्हिप के माध्यम से ही स्वीकार किया जाए।
‘बिना आधिकारिक पक्ष सुने न लिया जाए फैसला’
अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर से यह विशेष अनुरोध भी किया है कि TMC से अलग हुए किसी भी कथित धड़े या बागी गुट को संसद में कोई भी विशेष दर्जा, मान्यता या सुविधाएं न दी जाएं। उन्होंने पत्र में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हवाला देते हुए लिखा कि इस संवेदनशील विषय पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस को अपना पक्ष रखने का पूरा और उचित अवसर मिलना चाहिए। बनर्जी के अनुसार, पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व को सुने बिना किसी भी बागी गुट के दावे को स्वीकार करना या उसे मान्यता देना पूरी तरह से अनुचित और अलोकतांत्रिक होगा।
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